Andhra : गोल्ड प्रोजेक्ट फिर शुरू, चिगुरुगुंटा-बिसनाथम के लिए टेंडर प्रक्रिया तेज
Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: खनन क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कुरनूल जिले में जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से सफलतापूर्वक सोने का उत्पादन शुरू होने के बाद अब सरकार ने चित्तूर जिले के कुप्पम विधानसभा क्षेत्र में स्थित चिगुरुगुंटा-बिसनाथम गोल्ड प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह क्षेत्र मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से हाल ही में सोने का उत्पादन शुरू हुआ है और वहां से तैयार सोने की छड़ें कुरनूल शहर की कई ज्वेलरी दुकानों तक पहुंच चुकी हैं। इस सफलता के बाद राज्य में खनन क्षेत्र को लेकर उत्साह बढ़ गया है और नए निवेश व उत्पादन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
इसी पृष्ठभूमि में अब लंबे समय से बंद पड़ी चिगुरुगुंटा-बिसनाथम गोल्ड खदानों को दोबारा शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है। यह खदानें वर्ष 2001 से बंद पड़ी हैं और अब सरकार इन्हें पुनः सक्रिय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, 25 जून को आयोजित टेंडर प्रक्रिया में दो कंपनियों ने भाग लिया है। अब संबंधित विभाग इन बोलियों की जांच कर रहा है और जल्द ही नीलामी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि जोन्नागिरी प्रोजेक्ट की सफलता ने इस पूरे क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर नया भरोसा पैदा किया है। वहां शुरू हुआ उत्पादन न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
चिगुरुगुंटा-बिसनाथम परियोजना के पुनः शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है, तो आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख स्वर्ण उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरण मानकों के साथ इन खदानों को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ सुरक्षा और स्थिरता भी सुनिश्चित हो सके।
खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित कंपनी को खदानों के पुनरुद्धार और उत्पादन शुरू करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और तकनीकी मूल्यांकन भी किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की औद्योगिक और आर्थिक नीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जोन्नागिरी के बाद अब चिगुरुगुंटा परियोजना की संभावनाएं आंध्र प्रदेश में खनन क्षेत्र के विस्तार की दिशा में नए संकेत दे रही हैं।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार की यह पहल न केवल बंद पड़ी खदानों को पुनर्जीवित करने की दिशा में है, बल्कि इससे राज्य की आर्थिक वृद्धि, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।