Andhra: एससी के आदेश के बाद एसईसी ने सभी यूएलबी में चुनाव प्रक्रिया रोक दी
अमरावती: देर रात एक अहम घटनाक्रम में, आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग (AP SEC) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में चुनाव प्रक्रिया को तुरंत रोकने का आदेश दिया। इससे पहले आयोग ने केवल 19 नगर पालिकाओं में ही चुनाव प्रक्रिया रोकने का फैसला लिया था। इस नए फैसले के बाद पूरे राज्य में नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। अब इन आरोपों की फिर से जांच की जाएगी कि हिंसा और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था।
चुनाव आयोग ने यह निर्देश बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के पालन में जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और कुछ उम्मीदवारों की शिकायतों की जांच करे। आयोग को गुरुवार (22 अक्टूबर) तक यह तय करना है कि जिन मामलों में नामांकन दाखिल करने में बाधा डाली गई है, वहां नामांकन की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं।
आयोग ने 13 नगर निगमों और 87 नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी की थी। 16 से 18 अक्टूबर तक नामांकन लिए गए और 19 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) हुई। अब, जब तक चुनाव आयोग कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कोई फैसला नहीं ले लेता, तब तक सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया का अगला चरण रोक दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह शिकायतों और उनसे जुड़े सबूतों (जैसे वीडियो फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य) की जांच करे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि क्या उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का उचित मौका नहीं दिया गया। अगर आयोग को लगता है कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए, तो उसे नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी कहा है कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची, जिसे 21 अक्टूबर को जारी किया जाना था, उसे अब 25 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया जाए। अगर नामांकन की समय-सीमा बढ़ाई जाती है, तो उम्मीदवारों को अपना नामांकन दाखिल करने के लिए फैसला घोषित होने के बाद कम से कम 48 घंटे का समय मिलना चाहिए। साथ ही, जरूरत पड़ने पर चुनाव अधिसूचना में भी संशोधन किया जाना चाहिए।
इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि पूरे राज्य में नामांकन की समय-सीमा अपने आप बढ़ा दी गई है। इसके बजाय, चुनाव आयोग को सबूतों की जांच करनी होगी और उन मामलों की पहचान करनी होगी, जहां उम्मीदवारों को वास्तव में नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया था। बुधवार रात को जारी अपने आदेश में, SEC ने कहा कि वह कलेक्टर्स, जिला चुनाव अधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट मिलने के बाद 22 अक्टूबर को आगे का फैसला लेगा। कोर्ट के दखल के बाद, आयोग ने शुरुआत में 19 नगर पालिकाओं में चुनाव प्रक्रिया रोक दी थी, जबकि बाकी जगहों पर चुनाव जारी रखने की अनुमति दी थी। अब नए निर्देश के तहत, SEC द्वारा अपना आकलन पूरा किए जाने तक, सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने इस बात पर जोर दिया कि तय समय-सीमा के भीतर चुनाव कराने की जिम्मेदारी, उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का निष्पक्ष मौका देने की जरूरत से ऊपर नहीं हो सकती।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होनी है, जिसमें SEC और पुलिस महानिदेशक (DGP) को अनुपालन रिपोर्ट (compliance reports) जमा करनी होगी। गुरुवार को आयोग का फैसला यह तय करेगा कि क्या कुछ खास शहरी स्थानीय निकायों या वार्डों में नामांकन प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी और बाकी चुनाव कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ेगा।