अमरावती: SRM यूनिवर्सिटी-AP में आयोजित अमरावती लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन ग्राफ़िक स्टोरीटेलिंग, कविता, क्लाइमेट फ़िक्शन और पुरातत्व जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक साथ आए, जिससे फेस्टिवल का साहित्यिक और बौद्धिक दायरा बढ़ा।

ईश्वरी स्कूल ऑफ़ लिबरल आर्ट्स द्वारा आयोजित यह फेस्टिवल अमरावती क्षेत्र में साहित्यिक और सांस्कृतिक बातचीत के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है, जो भारतीय कहानियों को वैश्विक नज़रिए से जोड़ता है।

दिन की शुरुआत भारत में कॉमिक्स पर चर्चा के साथ हुई, जिसमें ग्राफ़िक नॉवेलिस्ट अप्पुपेन और कवि व अनुवादक चारबाक दीप्ता शामिल हुए। अप्पुपेन ने रचनात्मक अभिव्यक्ति पर उभरती हुई तकनीकों के प्रभाव पर विचार किया और प्रमाणिकता पर उनके असर पर सवाल उठाए। उन्होंने ग्राफ़िक स्टोरीटेलिंग के लिए भारतीय परिदृश्य, संस्कृति और जगहों को सशक्त सेटिंग के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारतीय क्रिएटर्स को पश्चिमी सेटिंग पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है।

चारबाक दीप्ता ने अनुवाद, संस्कृति, कविता और सिनेमा व ग्राफ़िक नॉवेल्स के बीच धुंधली होती सीमाओं पर चर्चा की। दोनों वक्ताओं ने उभरते लेखकों के साथ रचनात्मक प्रक्रिया और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में काम करने के तरीकों पर भी बातचीत की।

लेखक रजत चौधरी ने क्लाइमेट फ़िक्शन पर एक सेशन का नेतृत्व किया, जिसमें उम्मीद, जलवायु परिवर्तन और कहानी कहने व सक्रियता के बीच संबंध पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन समुदायों को सामूहिक रूप से प्रभावित करता है और तर्क दिया कि जब व्यक्तिगत कहानियों को एक साथ लाया जाता है, तो वे समाज की व्यापक सोच को प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने दर्शकों को वास्तविकता और कल्पना के बीच संबंध और कहानी कहने के साथ-साथ लोगों द्वारा कार्रवाई करने की आवश्यकता पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। पुरातत्वविद् रवि कोरिसेट्टर ने चर्चा का रुख भारत में शुरुआती मानव बस्तियों और विरासत संरक्षण की ओर मोड़ा। उन्होंने सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि खुदाई में ही एक अपूरणीय क्षति होती है, क्योंकि खोदी गई जगह को उसकी मूल स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता है।

दिन का समापन कलाकार बेगर शिवकुमार द्वारा यक्षगान प्रस्तुति के साथ हुआ। स्कूल के छात्रों के लिए समानांतर सेशन और ग्राफ़िक स्टोरीटेलर व शिक्षिका संहिता अर्नी द्वारा आयोजित रचनात्मक लेखन कार्यशाला भी कार्यक्रम का हिस्सा थे।

फेस्टिवल का समापन सिनेमाई कहानी कहने पर आधारित सेशन के साथ होगा, जिसमें पद्म श्री पुरस्कार विजेता और अनुभवी अभिनेता ब्रह्मानंदम का हास्य और प्रदर्शन कला पर संबोधन भी शामिल होगा।

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