राजमहेंद्रवरम: चक्रवात 'अरनाब' ने पूर्व गोदावरी जिले में भारी तबाही मचाई है। इससे फसलों, सड़कों, इमारतों, बिजली के बुनियादी ढांचे और रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे जनजीवन लगभग ठप हो गया है। तूफान और भारी बारिश के कारण हजारों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, धान के खेत जलमग्न हो गए, कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी बुरा असर पड़ा है।
सबसे ज्यादा नुकसान धान के किसानों को हुआ है, जिनकी फसलें कटाई से महज 10-15 दिन पहले ही पानी में डूब गईं। जिन फसलों से कुछ ही हफ्तों में अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद थी, वे तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गईं और बारिश के पानी में डूब गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। पेरावली और टुनी में केले के बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
गुरुवार रात तक इलाके के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। हजारों बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और बिजली की तारें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे ऊर्जा विभाग के लिए बिजली व्यवस्था बहाल करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अधिकारी और फील्ड स्टाफ पिछले दो दिनों से चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं ताकि खराब उपकरणों को बदला जा सके और बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके।
कई इलाकों में पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है, जबकि मोबाइल कनेक्टिविटी, संचार नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं।
चक्रवात का असर राजमहेंद्रवरम और इसके आसपास के कई कस्बों और गांवों में साफ देखा जा सकता है। शहर में कई जगहों पर बड़े पेड़ और होर्डिंग गिर गए; इनमें हेड पोस्ट ऑफिस परिसर के अंदर गिरा एक विशाल पेड़ भी शामिल है।
कोव्वुर में एक बड़ा होर्डिंग गिर गया, जबकि नल्लाकुलावारीपालेम में कई पेड़ उखड़ गए। पेरावली मंडल के खंडवल्ली गांव में बिजली की तारें टूट गईं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। कई जगहों पर गिरे पेड़ों के कारण यातायात बाधित हुआ। कालावाचारला में एक बहुत बड़ा पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे आवागमन पूरी तरह रुक गया।
आदिकवि नन्नय्या विश्वविद्यालय जाने वाली सड़क पर भी एक पेड़ गिर गया, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया। मंडपेटा बाईपास रोड पर भी पेड़ों के गिरने से यातायात बाधित हुआ, जबकि काडियम मंडल में वेमागिरी रोड के किनारे बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए।
एडिडा गांव में एक पेड़ खपरैल वाली छत वाले घर पर गिर गया, जिससे घर को काफी नुकसान पहुंचा है। नगरपालिका और अन्य सरकारी कर्मचारियों ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए गिरे हुए पेड़ों को हटाया, सड़कों को साफ किया और वाहनों की आवाजाही बहाल की। साथ ही, बिजली विभाग के कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों और बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम शुरू किया।
राजमहेंद्रवरम के कई इलाके जलमग्न हो गए, जिनमें पुष्कर घाट, रेलवे स्टेशन रोड, आरटी कॉम्प्लेक्स रोड, हाईटेक बस स्टैंड, कंबला चेरुवु, अलकोट गार्डन और इनिसपेटा शामिल हैं।
कोटीपल्ली बस स्टैंड इलाके में कुछ सरकारी कार्यालयों में भी पानी घुस गया, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ। रावुलापालेम, समलकोट, निदादावोलु, अमलापुरम और काकीनाडा के बस स्टेशनों में भी पानी भर गया, जिससे वहां जमा बारिश का पानी किसी तालाब जैसा दिखने लगा।
बुधवार को सभी डिपो से बस सेवाएं बंद रहीं। सड़कों की स्थिति और मौजूदा हालात को देखते हुए गुरुवार को कुछ सीमित सेवाएं बहाल की गईं। चक्रवात के कारण तटीय इलाकों में मछली पकड़ने से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ओदलारेवु में मछली पकड़ने वाली कई नावें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि अंतरवेदी में कुछ नावें समुद्र की रेत में दब गईं। काकीनाडा जिले में उप्पाडा रोड को समुद्री लहरों के तेज प्रहार से भारी नुकसान पहुंचा, जिससे तटीय इलाकों में आवाजाही और पहुंच प्रभावित हुई।
सड़कों के बंद होने, बिजली आपूर्ति ठप होने और कई जगहों पर संचार सेवाएं प्रभावित होने के कारण लोगों को जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बहाली टीमों ने सड़कों को साफ करने, बिजली के बुनियादी ढांचे की मरम्मत करने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने का काम जारी रखा।
कृषि, परिवहन, बिजली आपूर्ति और तटीय बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान ने पूरे पूर्वी गोदावरी क्षेत्र में हुए नुकसान के पैमाने को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
किसान और स्थानीय निवासी अब प्रशासन की ओर देख रहे हैं, ताकि जरूरी सेवाएं जल्द बहाल हो सकें और उन्हें अपनी आजीविका फिर से खड़ी करने के लिए समय पर मदद मिल सके।