विजयवाड़ा: रिलायंस फाउंडेशन ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले में चक्रवात 'अरनाब' के कारण फंसी या क्षतिग्रस्त हुई 180 से अधिक मछली पकड़ने वाली नावों को निकालने के लिए एक विशेष मैकेनिकल अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य मछुआरा समुदायों की आजीविका को फिर से बहाल करना है।
फाउंडेशन ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इस पहल से क्षेत्र में मछली पकड़ने के काम पर निर्भर लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।
चक्रवात 'अरनाब' ने ओडलारेवु और सखिनेतिपल्ली लैंडिंग सेंटरों पर मछुआरा समुदायों को बुरी तरह प्रभावित किया है। रिलायंस फाउंडेशन की टीमों द्वारा किए गए शुरुआती आकलन में अल्लावरम मंडल के इन दो स्थानों पर लगभग 186 प्रभावित नावें पाई गईं। कई नावें जमा हुई कीचड़, नहरों और दलदली इलाकों में फंस गई थीं, जबकि कुछ अन्य नावें अपनी जगह से हटकर आंशिक रूप से डूब गई थीं या एक-दूसरे के ऊपर जमा हो गई थीं।
चूंकि कई नावों का वजन 5 से 10 टन के बीच है, इसलिए उन्हें हाथ से निकालना मुश्किल और खतरनाक हो सकता है।
फाउंडेशन, अल्लावरम मंडल में मत्स्य विभाग और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि क्रेन सहित उपयुक्त मैकेनिकल उपकरणों की मदद से इन नावों को निकाला जा सके।
इस बचाव प्रक्रिया में नाव मालिकों से सलाह लेकर नावों की पहचान करना, उनकी लोकेशन की पुष्टि करना और उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना या सही जगह पर वापस रखना शामिल है। इस दौरान नावों को और अधिक नुकसान न पहुंचे, इसके लिए विशेष उपकरणों और सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह पहल मछुआरों को यह समझने में मदद करेगी कि नावों की मरम्मत के लिए क्या-क्या जरूरी है। साथ ही, इससे फंसी हुई नावों को और अधिक नुकसान पहुंचने से रोका जा सकेगा और मरम्मत व अन्य जरूरी शर्तों के पूरा होने पर मछुआरे जल्द से जल्द अपना काम फिर से शुरू कर सकेंगे।
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