IT मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश अपने डेटा-सेंटर विस्तार के लिए सस्टेनेबिलिटी (पर्यावरण के अनुकूल) पर आधारित तरीका अपना रहा है। इसके तहत यह ज़रूरी है कि डेटा-सेंटर में इस्तेमाल होने वाली कम से कम 70 प्रतिशत ऊर्जा रिन्यूएबल सोर्स (नवीकरणीय स्रोतों) से आए।

राज्य विशाखापत्तनम को एक बड़े डेटा-सेंटर हब के तौर पर विकसित कर रहा है, ताकि बड़े टेक्नोलॉजी निवेश को आकर्षित किया जा सके और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जा सके।

डेटा-सेंटर में आमतौर पर बहुत ज़्यादा ऊर्जा और पानी की ज़रूरत होती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए बिजली और पानी की भरोसेमंद सप्लाई के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल होना भी ज़रूरी है।

पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ़ इंडिया (PAFI) द्वारा आयोजित एक चर्चा में लोकेश ने कहा कि राज्य डेटा-सेंटर के विस्तार से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए एक "समग्र दृष्टिकोण" अपना रहा है। इसमें ऊर्जा, पानी और अन्य संसाधनों की ज़रूरतों को एक साथ पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

लोकेश ने कहा, "पहला नियम यह है कि डेटा-सेंटर में इस्तेमाल होने वाली कम से कम 70 प्रतिशत ऊर्जा रिन्यूएबल सोर्स से आनी चाहिए।" उन्होंने सोलर, विंड, पंप स्टोरेज और बैटरी-आधारित ऊर्जा जैसे स्रोतों का ज़िक्र किया।

उन्होंने बताया कि राज्य विशाखापत्तनम में एक डेटा-सेंटर क्लस्टर विकसित कर रहा है और पोलावरम लेफ्ट बैंक नहर के ज़रिए पानी की कुछ ज़रूरतों को पूरा करने की योजना भी बना रहा है।

लोकेश ने कहा कि पोलावरम प्रोजेक्ट से उस पानी का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी जो वरना बंगाल की खाड़ी में बह जाता। इस पानी को डेटा-सेंटर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विशाखापत्तनम भेजा जाएगा।

लोकेश ने बताया कि राज्य डेटा-सेंटर कंपनियों को डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) लगाने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक कंपनी पहले से ही ऐसी सुविधा लगा रही है।

डेटा-सेंटर को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की ज़रूरत हो सकती है। इससे स्थानीय जल संसाधनों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं, खासकर तब जब आंध्र प्रदेश इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

लोकेश ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए ऊर्जा, पानी और पर्यावरण से जुड़ी अन्य ज़रूरतों के प्रति राज्य का एकीकृत दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण होगा।

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