Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: रायलसीमा क्षेत्र के सूखे और गर्म इलाके अनंतपुर जिले में एक किसान ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसे पहले लगभग असंभव माना जाता था। इस क्षेत्र में जहां तापमान गर्मियों में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच जाता है और वर्षा भी बेहद कम होती है, वहीं कोटंका गांव के एक किसान ने सेब की सफल खेती कर सभी को चौंका दिया है।

यह सफलता Anantapur district के कोटंका गांव के 46 वर्षीय किसान एन.वी. रमना रेड्डी की है, जिन्होंने कठिन जलवायु परिस्थितियों के बावजूद सेब की भरपूर फसल उगाने में सफलता हासिल की है। सामान्यतः सेब की खेती ठंडे और पर्वतीय क्षेत्रों में ही संभव मानी जाती है, लेकिन उन्होंने इस धारणा को चुनौती दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, रमना रेड्डी की यह उपलब्धि तेलुगु राज्यों में व्यावसायिक रूप से सेब की खेती का पहला सफल उदाहरण मानी जा रही है और संभवतः प्रायद्वीपीय भारत में भी यह पहली बार है जब इतने गर्म इलाके में सेब की सफल पैदावार हुई है।

उनकी यह यात्रा आसान नहीं रही। वर्ष 2020 के आसपास उन्होंने हिमाचल प्रदेश से तीन प्रकार के सेब के पौधे मंगवाए और अपने खेत में रोपण किया। शुरुआती वर्षों में पौधों ने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया और फल बहुत छोटे आकार के ही रह गए। कई बार तो सेब नींबू से बड़े नहीं हो पाए।

लगातार साढ़े तीन वर्षों तक प्रयास करने के बाद भी उन्हें लगभग 8 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान कई विशेषज्ञों और आसपास के लोगों ने उन्हें यह खेती छोड़ने की सलाह दी, क्योंकि इस क्षेत्र की जलवायु सेब की खेती के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं मानी जाती थी।

किसान रमना रेड्डी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी भारी निराशा हुई और यह पूरा प्रयोग व्यर्थ लगने लगा था। उन्होंने कहा, “यह पैसे, समय और संसाधनों की पूरी तरह बर्बादी थी। मेरे आसपास के लोग कहते थे कि इतनी गर्मी में सेब उगाना संभव नहीं है, लेकिन मैंने जोखिम लिया।”

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने प्रयोग में सुधार करते रहे। सिंचाई, मिट्टी और पौधों की देखभाल के तरीकों में बदलाव कर उन्होंने धीरे-धीरे सफलता हासिल की। अंततः पेड़ों पर लाल और रसीले सेब तैयार हुए, जिसने पूरे इलाके में लोगों को हैरान कर दिया।

स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता भविष्य में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद बन सकती है। यदि इस तकनीक को सही तरीके से आगे बढ़ाया जाए, तो रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में भी फल उत्पादन की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

कुल मिलाकर, एन.वी. रमना रेड्डी की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारतीय कृषि के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गई है, जो यह साबित करती है कि सही प्रयास और धैर्य से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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