Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश : श्रीकाकुलम जिले के कासीबुग्गा स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार को एक भीषण भगदड़ मच गई, जिसमें 9 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना पर राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है जो भीड़ के अचानक बढ़ जाने और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण हुआ।”
नारा लोकेश ने बताया कि शनिवार को एकादशी होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। यह एक निजी मंदिर है, जहां सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक दर्शन होते हैं, उसके बाद मंदिर बंद कर 3 बजे दोबारा खोला जाता है। उन्होंने कहा कि “मंदिर में प्रवेश और निकास के दो अलग-अलग रास्ते हैं, लेकिन करीब 11:30 बजे जब भीड़ अनियंत्रित हो गई, तो सुरक्षा कर्मियों ने प्रवेश द्वार को बंद कर दिया। इस दौरान कई श्रद्धालु निकास द्वार से अंदर जाने लगे, जिससे अफरा-तफरी मच गई।”
मंत्री ने बताया कि प्रवेश द्वार पर सीढ़ियां हैं, जहां सबसे आगे खड़ी एक महिला श्रद्धालु फिसलकर गिर पड़ी, जिससे पीछे खड़े लोग भी गिरते चले गए और भगदड़ की स्थिति बन गई। इस दौरान दम घुटने और गिरने से कई लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकतर महिलाएं थीं। नारा लोकेश ने कहा कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। “हमने पांच मिनट के भीतर स्थानीय विधायक और मंत्री से संपर्क किया। राज्य के गृह मंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री को भी तत्काल सूचना दी गई। रियल टाइम गवर्नेंस व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सभी विभागों में समन्वय बनाकर राहत कार्य शुरू किए गए।”
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को ₹15 लाख की अनुग्रह राशि और गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹3 लाख देने की घोषणा की है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
मंत्री ने कहा कि घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से तीन को गंभीर हालत में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल रेफर किया गया है। “हम उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं, सरकार ने सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा लिया है,” उन्होंने कहा।
नारा लोकेश ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो इस घटना की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटना दोबारा न हो।
उन्होंने कहा कि “भक्तों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि आगे से किसी भी मंदिर या धार्मिक आयोजन में भीड़ नियंत्रण और आपात व्यवस्था की सख्त निगरानी की जाए।”
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में शोक की लहर है। कई श्रद्धालु जिन्होंने इस भगदड़ को अपनी आंखों से देखा, वे अब भी सदमे में हैं।
यह हादसा उस समय हुआ जब दर्शनार्थियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रबंधन द्वारा पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न किए जाने और भीड़ के रूट को नियंत्रित न कर पाने से यह त्रासदी हुई।