Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिले में एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने आई है। यहां एक 19 वर्षीय युवक को गंभीर हालत में इलाज के लिए करीब आठ किलोमीटर तक डोली यानी एक कामचलाऊ स्ट्रेचर में ले जाना पड़ा। युवक को चार दिनों से तेज बुखार था, लेकिन दूर-दराज और खराब सड़क संपर्क के कारण उसे समय पर मेडिकल सुविधा नहीं मिल सकी।
यह घटना अनंतगिरी मंडल की रोमपिल्ली पंचायत के डब्बालापाडु गांव की है। यहां रहने वाला युवक कोसुरी गोपीचंद कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। जब उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी तो गांव वालों ने उसे अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। लेकिन गांव तक पक्की सड़क न होने और परिवहन सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीणों के पास कोई बेहतर विकल्प नहीं था।
इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर डोली तैयार की और गोपीचंद को उस पर रखकर ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी रास्तों से पैदल ही पेदारबा तक ले जाया गया। यह सफर काफी कठिन था, क्योंकि रास्ते में कई जगह फिसलन और चढ़ाई-उतार थे। ग्रामीणों ने बारी-बारी से डोली उठाकर मरीज को संभाला और सुरक्षित आगे बढ़ते रहे।
पेदारबा पहुंचने के बाद मरीज को एक ऑटो-रिक्शा के जरिए गजपतिनगरम एरिया हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे भर्ती कर लिया और इलाज शुरू किया।
ग्रामीणों के अनुसार, अगर समय पर परिवहन सुविधा उपलब्ध होती तो मरीज को इतनी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। गांव में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण अक्सर गंभीर मरीजों को इस तरह की मुश्किलों से गुजरना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इलाके में बारिश के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं। ऐसे में बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति अभी भी कमजोर है। बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज के लिए लंबा और कठिन सफर करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क और आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डब्बालापाडु जैसे गांवों में जल्द से जल्द पक्की सड़क बनाई जाए और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इस तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर करती है, जहां आज भी लोग इलाज के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।