विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में बिना डंक वाली मधुमक्खियों (स्टिंगलेस बीज़) की दो प्रजातियों - 'टेट्रागोनुला इरिडिपिनिस' (Tetragonula iridipennis) और 'टेट्रागोनुला पैग्डेनी' (Tetragonula pagdeni) - की पहचान की गई है। एक अध्ययन के दौरान, अलग-अलग आवासों में इनकी 22 घोंसले बनाने की जगहें (नेस्टिंग साइट्स) दर्ज की गईं।

'आंध्र प्रदेश में बिना डंक वाली मधुमक्खियों की विविधता' (Diversity of Stingless Bees from Andhra Pradesh) शीर्षक वाला यह अध्ययन 2024-2025 के दौरान पार्वतीपुरम मन्यम, अल्लूरी सीताराम राजू (ASR), एलुरु, नंड्याल और पलनाडु जिलों में किया गया। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग जगहों पर 22 नेस्टिंग साइट्स खोजीं, जिनमें इमारतों की दीवारें, पेड़ों के तने, मिट्टी और पुरानी संरचनाओं की दरारें शामिल थीं। इससे पता चलता है कि ये मधुमक्खियां घोंसला बनाने के लिए किन जगहों को पसंद करती हैं और परागणकर्ता (pollinators) के रूप में इनका पारिस्थितिक महत्व क्या है।

इस अध्ययन के नतीजे 'इंडियन जर्नल ऑफ एंटोमोलॉजी' में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं की इस टीम में श्रीकांत, मल्लिकार्जुन राव, कोटेश्वर राव और रत्ना कुमारी शामिल थे।

इन दो प्रजातियों में से, 'टेट्रागोनुला इरिडिपिनिस' को अल्लूरी सीताराम राजू, पार्वतीपुरम मन्यम, एलुरु और नंड्याल की दो जगहों पर देखा गया। वहीं, 'टेट्रागोनुला पैग्डेनी' नंड्याल के थिम्मापुरम और पलनाडु की चेंचु कॉलोनी में पाई गई।

सर्वेक्षण की गई जगहों में, इमारतों की दीवारें घोंसला बनाने के लिए सबसे पसंदीदा जगह के रूप में सामने आईं। शोधकर्ताओं को ASR जिले में ऐसी इमारतों की दीवारों में इनकी कॉलोनियां मिलीं, जहां ज्यादा हलचल नहीं थी। पार्वतीपुरम मन्यम में ये पुरानी इमारतों की दरारों में पाई गईं। एलुरु में इनकी कॉलोनियां मिट्टी में मिलीं, जबकि नंड्याल और पलनाडु में इन्हें पेड़ों पर और पुरानी इमारतों की पत्थर की दीवारों पर देखा गया।

पहचानी गई दो प्रजातियों में से, 'टेट्रागोनुला इरिडिपिनिस' को ASR, पार्वतीपुरम मन्यम, एलुरु और नंड्याल की दो जगहों पर दर्ज किया गया। 'टेट्रागोनुला पैग्डेनी' की पहचान नंड्याल के थिम्मापुरम और पलनाडु की चेंचु कॉलोनी में हुई। शोधकर्ताओं ने इन नेस्टिंग साइट्स से मधुमक्खियों के नमूने एकत्र किए और उन्हें पहचान (taxonomic identification) के लिए विशेषज्ञों के पास भेजा। इन विशेषज्ञों में बेंगलुरु स्थित 'यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज' के कृषि कीट विज्ञान विभाग के एमेरिटस वैज्ञानिक एस. विरक्तमठ और 'जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया' के विशेषज्ञ शामिल थे।

आंध्र प्रदेश में स्थानीय रूप से 'मुसारी ईगा' के नाम से जानी जाने वाली डंक रहित मधुमक्खियाँ सामाजिक कीट हैं जो कॉलोनियों में रहती हैं और दीवारों, पेड़ों के तनों और मिट्टी की गुहाओं में घोंसले बनाती हैं। अपने घोंसले के स्थान के आधार पर, इन्हें स्थानीय रूप से दीवारों पर बने घोंसलों के लिए 'मुसारी तेने', पेड़ों पर बने घोंसलों के लिए 'बुरा तेने' और मिट्टी पर बने घोंसलों के लिए 'पुट्टा तेने' के नाम से भी जाना जाता है।

अपने कम डंक के बावजूद, ये मधुमक्खियाँ प्राकृतिक और कृषि पारिस्थितिक तंत्रों में परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये विभिन्न प्रकार के पुष्पीय पौधों पर जाती हैं और पौधों के प्रजनन और फसल उत्पादन में सहायता करती हैं।

 

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