लाइफस्टाइल: घर की बालकनी में रंग-बिरंगी तितलियां दिखाई दें तो छोटे से बगीचे की खूबसूरती और बढ़ जाती है। लेकिन केवल कुछ फूलों वाले गमले रख देने से तितलियों का नियमित आना सुनिश्चित नहीं होता। उन्हें भोजन के साथ धूप, हवा से बचाव और अंडे देने के लिए उपयुक्त पौधों की जरूरत होती है। बालकनी में इन जरूरतों का ध्यान रखकर तितलियों के आने की संभावना बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, नतीजा आसपास मौजूद प्रजातियों, मौसम, हरियाली और बालकनी की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।
फूलों के साथ कैटरपिलर के भोजन का भी रखें ध्यान
बटरफ्लाई गार्डन तैयार करते समय दो तरह के पौधों का अंतर समझना जरूरी है। वयस्क तितलियां फूलों से मकरंद लेती हैं, जबकि उनकी इल्लियां यानी कैटरपिलर खास पौधों की पत्तियां खाती हैं। इन पौधों को होस्ट प्लांट कहा जाता है। केवल मकरंद वाले फूल लगाने से तितलियां भोजन के लिए आ सकती हैं, लेकिन उनका जीवनचक्र पूरा होने के लिए उपयुक्त होस्ट प्लांट भी चाहिए। प्रत्येक तितली की इल्ली सभी पौधों की पत्तियां नहीं खाती।
अपने क्षेत्र में मिलने वाली तितलियों को देखकर पौधों का चुनाव करें। भारतीय परिस्थितियों में करी पत्ता, नींबू वर्ग के पौधे और बेल कुछ प्रजातियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, कौन-सा पौधा किस तितली के लिए उपयुक्त होगा, यह स्थानीय प्रजाति पर निर्भर है। नर्सरी से खरीदते समय पौधे का सही नाम और गमले में उसकी जरूरतें पूछें। बड़े आकार वाले पौधों के लिए पर्याप्त जगह और उपयुक्त कंटेनर जरूरी होगा।
ऐसे फूल चुनें जिनसे भोजन लेना आसान हो
फूल चुनते समय केवल रंग या आकार पर ध्यान न दें। सरल और खुले फूलों में मकरंद तक पहुंच अपेक्षाकृत आसान हो सकती है। बहुत घनी पंखुड़ियों वाली सजावटी किस्में हमेशा उतनी उपयोगी नहीं होतीं। अपने मौसम में अच्छी तरह खिलने वाले और स्थानीय परागणकर्ताओं के अनुकूल पौधे प्राथमिकता में रखें। साथ ही अलग-अलग समय पर फूल देने वाले पौधों का मिश्रण बनाएं, ताकि सभी गमलों में फूल एक साथ समाप्त न हो जाएं।
एक ही तरह के फूलों वाले कुछ पौधों को पास-पास रखने से भोजन का छोटा समूह बनता है। बालकनी में जगह सीमित हो तो अनेक प्रजातियों का एक-एक कमजोर पौधा लगाने के बजाय कुछ स्वस्थ पौधों से शुरुआत करें। गमलों के बीच इतना अंतर रखें कि पौधों को रोशनी और हवा मिलती रहे। व्यवस्था ऐसी हो कि तितलियां फूलों तक आसानी से पहुंच सकें और पत्तियां किसी जाली या दीवार से लगातार दबती न रहें।
धूप और हवा से बचाव का रखें संतुलन
तितलियां अपने शरीर को गर्म करने के लिए धूप का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए रोशनी वाला स्थान उनके लिए उपयोगी होता है। बालकनी में देखें कि किस हिस्से में सुबह या दिन के दौरान धूप आती है। उसी के अनुसार पौधे रखें। हालांकि, गर्म शहरों में दोपहर की तेज धूप गमलों को जल्दी सुखा सकती है। पौधे की जरूरत और स्थानीय तापमान के अनुसार जगह तय करें, ताकि फूल और पत्तियां लगातार झुलसें नहीं।
ऊंची इमारतों की बालकनी में तेज हवा भी चुनौती बन सकती है। हवा से कुछ बचाव देने वाले पौधे या सुरक्षित रूप से लगाई गई आड़ मददगार हो सकती है। ध्यान रहे कि इससे पूरी बालकनी बंद न हो जाए। तितलियों के आने-जाने का रास्ता खुला रहना चाहिए। धूप वाले हिस्से में एक छोटा, समतल पत्थर रखा जा सकता है, जहां वे बैठ सकें। इसे स्थिर जगह रखें और रेलिंग के बाहर कोई भारी वस्तु न रखें।
गहरे पानी की जगह नम रेत का छोटा पात्र
कुछ तितलियां नम मिट्टी या रेत से नमी और खनिज ग्रहण करती हैं। इस व्यवहार को ‘पडलिंग’ कहते हैं। इसके लिए उथली प्लेट में साफ रेत रखकर हल्की नमी बनाए रखी जा सकती है। प्लेट को पानी से लबालब भरने की जरूरत नहीं है। इसे फूलों के पास स्थिर स्थान पर रखें और नियमित सफाई करें। नम रेत की व्यवस्था तितलियों के लिए एक अतिरिक्त सुविधा है; सभी प्रजातियां इसका इस्तेमाल करेंगी, यह जरूरी नहीं।
गमलों में पानी देने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। पौधों को जरूरत के अनुसार पानी दें और जलनिकासी के छेद खुले रखें। सूखने से परेशान पौधों में फूल और मकरंद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, लगातार जलभराव जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। गमलों के नीचे रखी तश्तरियों में पानी जमा रहने न दें। बालकनी की साफ-सफाई के साथ पौधों की नियमित निगरानी करना लंबे समय तक स्वस्थ बगीचा बनाए रखने में मदद करेगा।
कीटनाशकों से बचें और पत्तियों पर नजर रखें
तितलियां आकर्षित करने वाले बगीचे में कीटनाशकों का इस्तेमाल सावधानी का विषय है, क्योंकि उनसे इल्लियां और दूसरे उपयोगी कीट भी प्रभावित हो सकते हैं। पत्तियों पर छोटे छेद देखकर तुरंत छिड़काव न करें। पहले पहचानें कि पौधे पर क्या मौजूद है। होस्ट प्लांट की कुछ पत्तियां खाई जाना तितली के जीवनचक्र का हिस्सा हो सकता है। प्राकृतिक या घरेलू घोल भी सीधे इल्लियों पर छिड़कना सुरक्षित मानकर न चलें।
आखिर में धैर्य रखें। पौधे लगाते ही अगले दिन तितलियों का पहुंचना तय नहीं है। कुछ सप्ताह निरीक्षण करें कि कौन-से फूल ज्यादा उपयोग में आते हैं और किन पौधों पर अंडे या इल्लियां दिखाई देती हैं। उसी अनुभव के आधार पर गमलों में बदलाव करें। छोटा बटरफ्लाई गार्डन सजावट के साथ जीवों की जरूरतें पूरी करने की कोशिश है। सही भोजन, उपयुक्त स्थान और कम हस्तक्षेप वाली देखभाल इसे अधिक उपयोगी बना सकती है।