लाइफस्टाइल : कभी आयताकार बिस्किट खाते समय आपने उनकी सतह पर छोटे-छोटे छेद जरूर देखे होंगे। पहली नजर में ये किसी डिजाइन का हिस्सा लगते हैं, लेकिन कई बिस्किट और क्रैकर्स में इनका तकनीकी काम भी होता है। बेकिंग के दौरान ये छेद भाप निकलने का रास्ता देते हैं और बिस्किट को अनियंत्रित तरीके से फूलने से रोकने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया को ‘डॉकिंग’ कहा जाता है।
ओवन में पहुंचते ही क्या होता है?
बिस्किट बनाने के लिए तैयार आटे में पानी या दूसरे तरल पदार्थों से आई नमी मौजूद रहती है। जब आटे के टुकड़े गर्म ओवन में पहुंचते हैं तो तापमान बढ़ने के साथ यह नमी भाप बनने लगती है। भाप फैलने के लिए जगह तलाशती है। अगर वह आटे के भीतर किसी हिस्से में फंस जाए तो वहां बुलबुला बन सकता है और सतह ऊपर उठ सकती है। पतले, सपाट क्रैकर में यही स्थिति उसे छोटे तकिए जैसी आकृति दे सकती है। पहले से किए गए छेद भाप को बाहर निकलने का रास्ता उपलब्ध कराते हैं।
बिस्किट का आकार नियंत्रित करने में मदद
हर बेकरी उत्पाद को एक जैसी बनावट नहीं देनी होती। ब्रेड में फूलना अच्छा माना जाता है, जबकि बहुत से क्रैकर्स में अपेक्षाकृत सपाट और नियमित आकार चाहिए होता है। इसलिए उनकी तैयारी का तरीका अलग रखा जाता है। आटे में छेद करने से बड़े, अनचाहे उभार कम करने में मदद मिलती है। इससे तैयार क्रैकर का आकार अपेक्षित रूप में रखा जा सकता है। हालांकि, डॉकिंग का मतलब यह नहीं कि बिस्किट बिल्कुल भी नहीं फूलेगा। उसका उद्देश्य फूलने की प्रक्रिया को जरूरत के अनुसार नियंत्रित करना है।
कैसे बनाए जाते हैं इतने एक जैसे छेद?
कारखानों में बिस्किट का आटा तैयार करने के बाद उसे निर्धारित मोटाई की शीट में बदला जाता है। फिर कटिंग और आकार देने वाली मशीनों से टुकड़े तैयार किए जाते हैं। कुछ उत्पादन लाइनों में रोलर पर लगे छोटे पिन आटे पर छेदों का पैटर्न बनाते हैं। इन्हें डॉकिंग पिन कहा जाता है। मशीन से यह काम करने का फायदा है कि बड़ी संख्या में बिस्किट पर एक जैसी जगहों पर छेद बनाए जा सकते हैं। आकार काटने और छेद बनाने की व्यवस्था उत्पादन लाइन के डिजाइन के अनुसार एक साथ या संबंधित चरणों में काम कर सकती है।
छेदों की जगह और गहराई भी मायने रखती है
छेद केवल बना देना पर्याप्त नहीं है। उनका सही स्थान और एकरूपता भी उत्पादन की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अलग-अलग टुकड़ों पर पिन ठीक तरह से काम न करें तो तैयार बिस्किट की बनावट में अंतर आ सकता है। इसलिए उत्पादन में आटे की मोटाई और मशीन की सेटिंग के साथ डॉकिंग की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है। यह रोज दिखने वाले खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल होने वाली छोटी, लेकिन उपयोगी प्रक्रिया है। सतह पर नजर आने वाला साधारण पैटर्न वास्तव में बेकिंग की जरूरत से जुड़ा हो सकता है।
क्या कुरकुरापन सिर्फ छेदों से आता है?
छेद भाप निकालने और आकृति नियंत्रित करने में मदद करते हैं, लेकिन केवल इन्हीं से बिस्किट कुरकुरा नहीं बनता। आटे की रेसिपी, उसकी मोटाई, बेकिंग का तापमान और पकाने का समय भी परिणाम बदलते हैं। उदाहरण के लिए, एक ही आटे के पतले और मोटे टुकड़े अलग तरीके से पक सकते हैं। इसी तरह ओवन की ट्रे में अलग-अलग जगह तापमान का असर भी भिन्न हो सकता है। घरेलू क्रैकर बनाने की विधियों में ट्रे को बीच में घुमाने का निर्देश इसी वजह से दिया जाता है, ताकि रंग अपेक्षाकृत समान आए।
हर बिस्किट में छेद होना जरूरी नहीं
बाजार में कई कुकीज और बिस्किट बिना छेदों के भी मिलते हैं। इससे यह नहीं माना जा सकता कि वे गलत तरीके से बनाए गए हैं। अलग उत्पादों के लिए आटा, आकार और अपेक्षित बनावट अलग होती है। बिस्किट बनाने वाले उपकरणों में भी हार्ड डो और सॉफ्ट डो उत्पादों के लिए अलग प्रक्रियाएं इस्तेमाल होती हैं। इसलिए क्रैकर की जरूरत को हर कुकी पर लागू करना सही नहीं होगा। किसी बिस्किट पर छेद हैं या नहीं, इससे उसकी गुणवत्ता का अकेले निर्णय नहीं किया जा सकता।
घर में कांटे से भी कर सकते हैं डॉकिंग
घर पर पतले क्रैकर्स बनाते समय कई विधियों में आटा बेलने और काटने के बाद कांटे से छोटे छेद करने को कहा जाता है। इसके बाद टुकड़ों को विधि में बताए तापमान और समय के अनुसार बेक किया जाता है। इस छोटे प्रयोग से डॉकिंग का उद्देश्य समझा जा सकता है। हालांकि, हर रेसिपी में अपने आप बदलाव करने के बजाय उसके निर्देशों का पालन करना बेहतर है। छेद करना सही बेकिंग तापमान और समय का विकल्प नहीं है।
चाय के लिए नहीं, बेकिंग के लिए बनते हैं छेद
बिस्किट में ये छेद मुख्य रूप से उसे चाय सोखने के लिए नहीं बनाए जाते। इनकी भूमिका बनाने की प्रक्रिया में है। वहीं, “90 प्रतिशत लोगों को जवाब नहीं मालूम” जैसी बात के समर्थन में कोई विश्वसनीय सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं है। अगली बार बिस्किट देखें तो उसके छोटे छेदों को भाप और बनावट नियंत्रित करने वाली तकनीक के रूप में पहचान सकते हैं।