लाइफ स्टाइल : आज के समय में नौकरी और बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन बनाना कई माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती है। खासकर कामकाजी महिलाओं को ऑफिस की जिम्मेदारियों के साथ बच्चों की देखभाल, पढ़ाई और भावनात्मक जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में कई बार माताओं को यह चिंता सताती है कि कहीं व्यस्तता के कारण वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही हैं। इसी बीच पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के पेरेंटिंग टिप्स चर्चा में हैं। दो बेटियों की मां दिव्या मित्तल ने अपने अनुभवों के आधार पर बच्चों को आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और जिम्मेदार बनाने के लिए सात महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए अपनी दोनों बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी भी निभाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया था कि बच्चों की परवरिश से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें उन्होंने अपनी मां से सीखी हैं। उनकी मां ने तीन बच्चों की परवरिश की, जिन्होंने आगे चलकर आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की। दिव्या का मानना है कि बच्चों को केवल सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।
1. बच्चों को खुद पर विश्वास करना सिखाएं
दिव्या मित्तल के अनुसार, माता-पिता को बचपन से ही बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए। उन्हें यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि वे मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।बच्चों को बार-बार उनकी कमियां बताने के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे उनमें नई चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत विकसित हो सकती है।
2. गलतियां करने और उनसे सीखने का मौका दें
कई माता-पिता बच्चों को हर परेशानी से बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन दिव्या मित्तल का मानना है कि बच्चों को उम्र के अनुसार छोटी-छोटी गलतियां करने और उनसे सीखने का अवसर देना चाहिए।जब बच्चे किसी काम में असफल होते हैं और दोबारा प्रयास करते हैं, तो उनमें समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित होती है। हालांकि, बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
3. हार और जीत दोनों को स्वीकार करना सिखाएं
दिव्या मित्तल के मुताबिक, बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।हर प्रतियोगिता जीतना जरूरी नहीं है। कई बार हार से मिलने वाली सीख भी महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता को बच्चों को समझाना चाहिए कि असफलता जीवन का हिस्सा है और इससे निराश होने के बजाय आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
4. बच्चों को नई चुनौतियां लेने दें
बच्चों को हमेशा सुरक्षित दायरे में सीमित रखने के बजाय उन्हें उम्र के अनुसार नई गतिविधियां आजमाने का अवसर देना चाहिए।खेलकूद, नई चीजें सीखना और छोटी जिम्मेदारियां संभालना बच्चों को स्वतंत्र बनने में मदद कर सकता है। दिव्या का सुझाव है कि माता-पिता बच्चों को हर कदम पर रोकने के बजाय उनका मार्गदर्शन करें और जरूरी सुरक्षा के साथ अनुभव हासिल करने दें।
5. बच्चों की सोच को सीमित न करें
दिव्या मित्तल का कहना है कि माता-पिता को अपनी पुरानी परेशानियों और सीमित संसाधनों के अनुभवों के आधार पर बच्चों के सपनों को छोटा नहीं करना चाहिए।आज बच्चों के सामने सीखने और आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं। उन्हें अपनी रुचियों को पहचानने, नए कौशल सीखने और बेहतर भविष्य के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
6. बच्चों के सामने खुद अच्छा उदाहरण बनें
बच्चे केवल माता-पिता की बातें नहीं सुनते, बल्कि उनके व्यवहार को देखकर भी सीखते हैं।अगर माता-पिता बच्चों को अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत का महत्व समझाते हैं, तो उन्हें अपने व्यवहार में भी इन गुणों को अपनाना चाहिए।दिव्या मित्तल के अनुसार, बच्चों के सामने माता-पिता का आचरण उनकी सीख का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए केवल सलाह देना ही नहीं, बल्कि उसका पालन करना भी जरूरी है।
7. बच्चों पर भरोसा करें और अनुभव करने दें
दिव्या मित्तल का अंतिम महत्वपूर्ण सुझाव है कि माता-पिता बच्चों की क्षमताओं पर विश्वास रखें।उन्हें नई जगहों पर जाने, अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेने और दुनिया को समझने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनका अनुभव बढ़ सकता है और वे अपने फैसले लेना सीख सकते हैं।बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि कठिन परिस्थितियों में उनके माता-पिता उनका साथ देंगे। गलती होने पर उन्हें लगातार डांटने के बजाय सुधार का अवसर देना अधिक उपयोगी हो सकता है।
कामकाजी माताओं के लिए खास संदेश
दिव्या मित्तल ने मातृत्व की चुनौतियों को लेकर भी अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया था कि दो बेटियों की परवरिश के दौरान उन्हें कई बार थकान और अपराधबोध जैसी भावनाओं का सामना करना पड़ा। उनके अनुभव बताते हैं कि बच्चों की परवरिश में हर समय परफेक्ट बनने का दबाव लेने के बजाय धैर्य, भरोसे और सहयोग को महत्व देना जरूरी है।इन सात सुझावों का मुख्य संदेश यही है कि बच्चों को केवल सफलता के लिए तैयार न करें, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएं। हर बच्चे की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए माता-पिता इन सुझावों को अपने परिवार और बच्चे की उम्र के अनुसार अपना सकते हैं।
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