पटाखों का धुआं और तेज आवाज खतरनाक, बच्चों-बुजुर्गों को रखें सुरक्षित
दिवाली की खुशियों में न हो सेहत से खिलवाड़
नई दिल्ली: दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और उत्साह का प्रतीक है। इस अवसर पर लोग अपने घरों को दीपों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। हालांकि, त्योहार के दौरान पटाखों का अत्यधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और तेज आवाज दिल, कान, आंखों और सांस से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती है। विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कण और कई प्रकार के हानिकारक रसायन मौजूद हो सकते हैं। ये प्रदूषक सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, हृदय रोग या सांस संबंधी समस्या है, उनके लिए प्रदूषण का बढ़ना अधिक नुकसानदायक हो सकता है।
पटाखों की तेज आवाज भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। अचानक होने वाले तेज धमाकों से कानों में दर्द, घंटी बजने जैसी आवाज और सुनने की क्षमता प्रभावित होने की शिकायत हो सकती है। अत्यधिक शोर के संपर्क में आने से कुछ मामलों में सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों की आवाज से छोटे बच्चे अधिक घबरा सकते हैं। वहीं, बुजुर्गों और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में अचानक तेज आवाज तनाव और बेचैनी पैदा कर सकती है। इसलिए ऐसे लोगों को अधिक शोर वाले स्थानों से दूर रखना बेहतर है। दिवाली पर आंखों की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। पटाखे जलाते समय निकलने वाली चिंगारी, गर्म कण और धुआं आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार पटाखे अचानक फटने से आंखों में गंभीर चोट लग सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
आंखों में पटाखे की चिंगारी या कोई बाहरी कण चले जाने पर आंखों को रगड़ना नहीं चाहिए। यदि आंख में रसायन या धुआं जाने से जलन हो रही हो, तो साफ पानी से धीरे-धीरे धोना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, आंख में गंभीर चोट लगने या कोई वस्तु धंसने की आशंका होने पर दबाव नहीं डालना चाहिए और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए भी परेशानी बढ़ा सकता है। अस्थमा के मरीजों में खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी शिकायतें हो सकती हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
चिकित्सकों की सामान्य सलाह है कि अस्थमा और हृदय रोग के मरीज अपनी नियमित दवाएं चिकित्सक के निर्देशानुसार लेते रहें। जिन मरीजों को डॉक्टर ने आपातकालीन इनहेलर दिया है, वे उसे अपने पास रखें। सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द या बेहोशी जैसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। पटाखे जलाते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। बच्चों को बिना वयस्क निगरानी के पटाखे नहीं जलाने देने चाहिए। पटाखों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना, सूती कपड़े पहनना और आसपास पानी की व्यवस्था रखना दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं और किसी ऐसे पटाखे के पास दोबारा न जाएं जो जलाने के बाद नहीं फटा हो। पटाखों से जलने पर प्रभावित हिस्से को लगभग 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। जले हुए स्थान पर टूथपेस्ट, तेल या घरेलू लेप नहीं लगाना चाहिए। गंभीर जलन होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। दिवाली के दौरान बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए घर में अपेक्षाकृत शांत और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना लाभकारी हो सकता है। जिन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण अधिक हो, वहां बाहरी गतिविधियों को सीमित करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उचित तरीके से लगाया गया एन95 मास्क हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है।
त्योहार के दौरान लोगों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अत्यधिक शोर और धुएं का असर केवल पटाखे जलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। आसपास रहने वाले बच्चे, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और अन्य लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। दिवाली खुशियां बांटने का पर्व है। ऐसे में स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। दीपक, रंगोली और रोशनी के माध्यम से भी त्योहार को उत्साहपूर्वक मनाया जा सकता है। पटाखों से होने वाले जोखिमों को समझकर और आवश्यक सावधानियां अपनाकर परिवार तथा आसपास के लोगों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।