लाइफस्टाइल:  नींद बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर चेहरे की ताजगी पर दिख सकता है। हालांकि, किसी खास योगासन से त्वचा अपने आप चमकने, रंग साफ होने या दाग-धब्बे मिटने की गारंटी नहीं है। योग को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा समझकर अपनाना बेहतर है। 

त्वचा और तनाव का संबंध समझें
तनाव का असर केवल मन पर नहीं पड़ता। कुछ लोगों में इससे मुंहासे, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए तनाव संभालने वाली आदतें त्वचा की देखभाल में सहायक हो सकती हैं। फिर भी योग त्वचा रोगों के इलाज का विकल्प नहीं है। चेहरे की रौनक के लिए जरूरी है कि शरीर को पर्याप्त आराम मिले और त्वचा की जरूरत के अनुसार देखभाल हो। योग से मिलने वाले सामान्य स्वास्थ्य लाभ को किसी एक आसन के सीधे सौंदर्य लाभ के रूप में नहीं समझना चाहिए। 
ताड़ासन: शरीर को सहज खिंचाव दें
समतल जगह पर खड़े होकर दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। वजन दोनों पैरों पर बराबर रखें और घुटनों को जोर से पीछे न दबाएं। सांस लेते हुए हाथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कंधे आराम में रहें और गर्दन सामने की ओर सीधी रखें। शुरुआत में एड़ियां जमीन पर रखकर ही अभ्यास करें। दो से तीन सामान्य सांसों तक रुकें, फिर हाथ नीचे लाएं। इसे दो या तीन बार दोहरा सकते हैं। इसका उद्देश्य शरीर की स्थिति और संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कमर पीछे मोड़कर या सांस रोककर खिंचाव बढ़ाने की कोशिश न करें।
शशांकासन: आराम से आगे झुकें
घुटने मोड़कर एड़ियों की ओर बैठें। आराम हो तो घुटनों के बीच थोड़ा अंतर रखें। सांस छोड़ते हुए धड़ को धीरे-धीरे आगे ले जाएं और हाथ सामने रखें। माथा जमीन तक न पहुंचे तो उसके नीचे तकिया रख सकते हैं। कुछ सामान्य सांसें लेने के बाद धीरे वापस बैठें। पेट और जांघों पर अनावश्यक दबाव न डालें। घुटने या टखने में दर्द हो तो यह आसन छोड़ दें। आगे झुकने का लक्ष्य माथा जमीन से लगाना नहीं, बल्कि सहज स्थिति में विश्राम करना है।
सरल भुजंगासन: कम ऊंचाई से शुरुआत करें
पेट के बल लेटें और पैरों को सहज दूरी पर रखें। हथेलियां कंधों के पास टिकाएं, कोहनियां शरीर के करीब रहें। सांस लेते हुए सिर और छाती का ऊपरी हिस्सा थोड़ा उठाएं। पेट का निचला भाग जमीन पर रहने दें। हाथों से जोर लगाकर शरीर बहुत ऊपर न उठाएं। नजर सामने या हल्की नीचे रखें, ताकि गर्दन पीछे न खिंचे। एक-दो सामान्य सांसों के बाद नीचे आकर आराम करें। कमर में चुभन या दर्द होने पर तुरंत रुकें। शुरुआत में छोटे और नियंत्रित अभ्यास पर्याप्त हैं।
सुखासन में बैठकर सहज श्वास लें
आराम से पालथी लगाकर बैठें। जमीन पर बैठना कठिन हो तो पीठ को सहारा देकर कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं। कंधे ढीले रखें और चेहरे की मांसपेशियों को सहज छोड़ें। नाक से सामान्य गति में सांस लें और आराम से छोड़ें। एक से तीन मिनट तक सांसों की आवाजाही पर ध्यान दें। गहरी सांस लेने के लिए जोर न लगाएं और सांस रोकने की जरूरत नहीं है। यह आसन के साथ किया जाने वाला श्वास-जागरूकता अभ्यास है। चक्कर आए तो सामान्य सांस लेते हुए रुक जाएं।
शवासन: अभ्यास के बाद दें आराम
पीठ के बल लेटकर हाथ-पैर थोड़ी दूरी पर रखें। हथेलियां ऊपर की ओर और कंधे ढीले रहें। कमर में असुविधा हो तो घुटनों के नीचे तकिया रख लें। आंखें बंद करके शरीर के अलग-अलग हिस्सों का तनाव छोड़ने पर ध्यान दें।तीन से पांच मिनट तक आराम करें। उठते समय पहले करवट लें और फिर हाथों की मदद से बैठें। जल्दबाजी में उठना आवश्यक नहीं है। अभ्यास के बाद कुछ देर विश्राम पूरी दिनचर्या को सहज बनाने में मदद कर सकता है।
त्वचा की बुनियादी देखभाल भी रखें जारी
योग के साथ चेहरे को सौम्य क्लींजर से साफ करें और जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाएं। बाहर निकलते समय छाया, ढकने वाले कपड़ों और कम से कम एसपीएफ 30 वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन से धूप का बचाव करें। पसीना आने पर त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय धीरे साफ करें। 
अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार करें
शुरुआत पांच से दस मिनट से करें और आसनों के बीच आराम लें। दर्द सहकर अभ्यास करना लाभ का संकेत नहीं है। गर्भावस्था, हाल की सर्जरी, गंभीर कमर या गर्दन की समस्या अथवा अन्य बीमारी में प्रशिक्षित योग शिक्षक और चिकित्सक से उपयुक्त बदलाव पूछें। चेहरे पर लगातार पीलापन, सूजन, खुजली या दाने हों तो केवल योग पर निर्भर न रहें। नियमित अभ्यास, पर्याप्त नींद और सही त्वचा देखभाल का मेल उपयोगी है; परिणाम प्रत्येक व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।

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