लाइफस्टाइल:  बदलते मौसम, बारिश या ठंडी सुबह के कारण कई बार जिम जाने का मन नहीं करता। बाहर निकलने की तैयारी और समय की कमी भी व्यायाम टालने की वजह बन जाती है। लेकिन सक्रिय रहने के लिए हर बार जिम पहुंचना जरूरी नहीं है। घर में थोड़ी सुरक्षित जगह, आरामदायक कपड़े और अपनी क्षमता के अनुरूप गतिविधियां चुनकर भी दिनचर्या में शारीरिक सक्रियता बनाए रखी जा सकती है। शुरुआत में कठिन वर्कआउट करने के बजाय छोटे और नियमित अभ्यास अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं। स्वास्थ्य दिशानिर्देश भी धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाने पर जोर देते हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता की एरोबिक गतिविधि अथवा 75 से 150 मिनट अधिक तीव्रता की गतिविधि करनी चाहिए। साथ में सप्ताह में कम से कम दो दिन प्रमुख मांसपेशियों को मजबूत करने वाले अभ्यास की सलाह है। यह साप्ताहिक लक्ष्य है, जिसे शुरुआत के दिन ही पूरा करने का दबाव नहीं लेना चाहिए। कम सक्रिय व्यक्ति थोड़े समय से शुरू करके अवधि और तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। 
वर्कआउट शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करें। अपनी जगह पर धीरे-धीरे कदमताल करना, कंधे घुमाना और बारी-बारी से एड़ियां आगे रखना वार्मअप के आसान विकल्प हैं। एनएचएस की सामान्य वार्मअप दिनचर्या लगभग छह मिनट की है। शुरुआत में चाल धीमी रखें और शरीर सहज होने पर गति बढ़ाएं। सीधे तेज उछलने या कठिन अभ्यास पर जाने के बजाय नियंत्रित गतिविधियों से शुरुआत करें। वार्मअप के दौरान भी दर्द होने पर गतिविधि रोक दें। 
घर के भीतर चलना सक्रिय रहने का सुविधाजनक तरीका है। कमरे या गलियारे में रास्ता साफ करके थोड़ी देर चलें। जगह कम हो तो एक स्थान पर कदमताल कर सकते हैं। लंबे समय से निष्क्रिय लोग पांच मिनट की छोटी अवधि से शुरुआत कर सकते हैं और सहज लगने पर समय बढ़ा सकते हैं। एक ही बार लंबा सत्र करना मुश्किल हो तो दिन में अलग-अलग समय पर चलना भी विकल्प है। फर्श पर तार, ढीली चटाई या अन्य बाधाएं न रहने दें। 
पैरों के अभ्यास के लिए मजबूत कुर्सी से बैठना और उठना उपयोगी विकल्प है। बिना पहियों वाली, न फिसलने वाली कुर्सी चुनें। दोनों पैर जमीन पर रखें और उन्हें लगभग कूल्हों की चौड़ाई जितना अलग रखें। थोड़ा आगे झुककर धीरे उठें, सीधे खड़े हों और नियंत्रित तरीके से वापस बैठें। एनएचएस इस अभ्यास के लिए शुरुआत में पांच दोहराव बताता है। जल्दबाजी से संख्या बढ़ाने के बजाय संतुलन और सहज गति पर ध्यान दें। जरूरत हो तो सुरक्षित सहारा लें। 
ऊपरी शरीर के अभ्यास के लिए दीवार पर पुश-अप आजमाया जा सकता है। दीवार से लगभग एक हाथ की दूरी पर खड़े होकर हथेलियां छाती की ऊंचाई पर टिकाएं। पीठ सीधी रखते हुए कोहनियां धीरे मोड़ें और शरीर को दीवार की ओर ले जाएं। फिर धीरे वापस आएं। अपनी क्षमता के अनुसार कम दोहराव से शुरू करें। कंधे या कलाई में दर्द हो तो जोर न लगाएं। इस अभ्यास में शरीर की स्थिति और नियंत्रित गति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। 
जिन लोगों को खड़े होकर व्यायाम करना कठिन लगता है, वे बैठकर हल्की गतिविधियां चुन सकते हैं। कुर्सी पर सीधे बैठकर बारी-बारी से पैर थोड़ा उठाना और टखनों को नियंत्रित ढंग से हिलाना आसान शुरुआत हो सकती है। कुर्सी स्थिर हो और पैर आराम से जमीन तक पहुंचें। पीठ तथा कंधों को अनावश्यक तनाव न दें। एनएचएस के अनुसार, हल्के बैठकर किए जाने वाले अभ्यास गतिशीलता सुधारने में मदद कर सकते हैं। दोहराव धीरे बढ़ाएं और अपनी क्षमता के अनुरूप अभ्यास चुनें। 
हल्की स्ट्रेचिंग भी दिनचर्या में शामिल की जा सकती है। सीधे बैठकर गर्दन धीरे एक तरफ घुमाएं और उतनी ही सीमा तक जाएं, जहां खिंचाव आरामदायक लगे। फिर दूसरी तरफ दोहराएं। कंधों और शरीर के अन्य हिस्सों को भी झटके के बिना हिलाएं। स्ट्रेचिंग में अधिक दूर तक पहुंचना लक्ष्य नहीं है। दर्द पैदा करने वाले खिंचाव से बचें। नियमित लचीलेपन के अभ्यास शरीर की गति बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें पूरे एरोबिक वर्कआउट का विकल्प न मानें। 
यदि चलना नीरस लगे तो पसंदीदा संगीत पर हल्का डांस भी गतिविधि का विकल्प है। शुरुआत सरल कदमों से करें और फिसलने या टकराने का जोखिम न लें। व्यायाम की तीव्रता समझने के लिए ‘टॉक टेस्ट’ मददगार है। अमेरिकी सीडीसी के अनुसार, मध्यम तीव्रता की गतिविधि में आम तौर पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन गाना मुश्किल होता है। सामान्य हलचल भी उपयोगी है, हालांकि हर धीमी गतिविधि मध्यम तीव्रता के साप्ताहिक लक्ष्य में नहीं गिनी जाएगी। 
आदत बनाए रखने के लिए रोज एक सुविधाजनक समय चुनें और शुरुआत का लक्ष्य छोटा रखें। व्यायाम समाप्त करते समय चाल धीरे करके शरीर को सामान्य स्थिति में आने दें। पानी पास रखें और आरामदायक कपड़े पहनें। बुखार, बीमारी या चोट होने पर खुद को जोर लगाकर व्यायाम करने के लिए मजबूर न करें। सीने में दर्द, चक्कर या असामान्य सांस फूलने पर तुरंत रुकें और चिकित्सकीय सहायता लें। पुरानी बीमारी, हाल की सर्जरी या व्यायाम की उपयुक्तता को लेकर संशय हो तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर दिनचर्या तय करें।

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