मुंबई: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे सुरीली, दर्दभरी और रूह को छू लेने वाली आवाजों का जिक्र होता है, तो गायक मुकेश का नाम सबसे ऊपर आता है। मुकेश सिर्फ हिंदी सिनेमा की आत्मा नहीं थे, बल्कि उनकी आवाज का जादू भारतीय समाज के ताने-बाने में इस कदर बुना हुआ था कि वह हर आम और खास इंसान के सुख-दुख के साथी बन गए थे। एक दौर था जब रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और छोटे बाजारों में मिलने वाली गानों की किताबों में सबसे ज्यादा मांग मुकेश के 'दर्दीले' नग्मों की होती थी। जब भी कोई भारतीय उदास होता था, तो मुकेश के गीत उसके होठों पर सज जाते थे। सुरों के इसी सरताज का एक ऐसा जबरा प्रशंसक (Fan) भारतीय क्रिकेट टीम में भी था, जिसने मुकेश के गानों से प्रेरणा पाकर क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड की धरती पर अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
हम बात कर रहे हैं भारत के महान और जादुई लेग स्पिनर बी.एस. चंद्रशेखर (B.S. Chandrasekhar) की। चंद्रशेखर अपने जमाने के उन गेंदबाजों में से थे, जिनका सामना करने से दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज भी थर-थर कांपते थे। लेकिन इस खूंखार स्पिनर के भीतर एक बेहद संवेदनशील और संगीत प्रेमी दिल धड़कता था, जो पूरी तरह से मुकेश के गानों का दीवाना था।
मुकेश का गाना बजने पर रुक जाती थी चंद्रशेखर की गेंदबाजी
बी.एस. चंद्रशेखर की मुकेश के प्रति दीवानगी के कई दिलचस्प किस्से क्रिकेट के गलियारों में मशहूर हैं। ऐसा कई बार हुआ कि जब चंद्रशेखर मैदान पर गेंदबाजी कर रहे होते थे और बाउंड्री लाइन के पास बैठा कोई दर्शक अपने साथ लाए ट्रांजिस्टर या रेडियो पर मुकेश का कोई सदाबहार गाना बजा देता था, तो चंद्रशेखर अपनी गेंदबाजी का रन-अप छोड़कर वहीं रुक जाते थे। वे ओवर फेंकने से पहले कुछ पल ठहरकर उस मधुर धुन को सुनते थे और फिर एक जादुई गेंद फेंककर बल्लेबाज को पवेलियन का रास्ता दिखा देते थे। उनके साथी खिलाड़ी भी जानते थे कि चंद्रशेखर को जोश में लाने का सबसे सही तरीका मुकेश के गाने ही हैं।
जब मुकेश के गानों से प्रेरित होकर इंग्लैंड में रचा इतिहास
चंद्रशेखर और मुकेश के संगीत का सबसे ऐतिहासिक कनेक्शन साल 1971 के भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच के दौरान देखने को मिला था। भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी और ओवल के मैदान पर मैच खेला जा रहा था। इंग्लैंड को उनकी अपनी ही पिचों पर हराना उस दौर में नामुमकिन माना जाता था। मैच के बेहद तनावपूर्ण माहौल में खुद को शांत और केंद्रित रखने के लिए चंद्रशेखर लगातार वॉकमेन और ड्रेसिंग रूम में मुकेश के गाने सुन रहे थे।
राज कपूर की फिल्मों के लिए मुकेश द्वारा गाए गए 100 से भी अधिक प्रतिष्ठित और प्रेरणादायक गानों ने चंद्रशेखर के भीतर एक अलग ही ऊर्जा भर दी। उन्होंने मैदान पर उतरकर ऐसा कहर बरपाया कि इंग्लैंड की पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई। चंद्रशेखर ने उस मैच में महज 38 रन देकर 6 विकेट चटकाए, जिसकी बदौलत भारत ने इंग्लैंड को उसकी ही धरती पर करारी शिकस्त देकर एक ऐतिहासिक सीरीज जीती थी।
मुकेश के गीतों के बारे में सबसे खूबसूरत बात यही है कि वे हमारे भीतर थोड़े-थोड़े मौजूद हैं। जब हमारे भीतर रूमानियत की खुशबू महकती है या जब हम जीवन के संघर्षों से जूझ रहे होते हैं—मुकेश हमेशा अपनी आवाज के जरिए हमारे साथ खड़े दिखाई देते हैं। क्रिकेट के मैदान पर चंद्रशेखर की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कला और खेल की कोई सीमा नहीं होती और एक महान गायक की आवाज किसी खिलाड़ी को देश के लिए इतिहास रचने का हौसला भी दे सकती है।