मां की लोरी जैसा सुकून देता है ये भोजपुरी लोकगीत लता ने किया अमर
मां की ममता वाला भोजपुरी लोकगीत
नई दिल्ली: भोजपुरी संगीत की दुनिया में कुछ गीत ऐसे होते हैं, जो सिर्फ धुन नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं और बचपन की यादों से जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक भोजपुरी लोकगीत है, जिसे सुनकर यूपी-बिहार की कई पीढ़ियां बड़ी हुई हैं। इसकी मिठास और भावनाओं ने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।
इस लोकगीत को मशहूर गायिका लता मंगेशकर की आवाज ने और भी खास बना दिया। उनकी मधुर आवाज में गाया गया यह गीत आज भी लोगों को मां की लोरी जैसा सुकून देता है और सुनते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।
भोजपुरी संस्कृति और भावनाओं की झलक
भोजपुरी लोकगीतों की खासियत यह है कि इनमें गांव की मिट्टी, रिश्तों का प्यार और जीवन की सादगी दिखाई देती है। इस गीत में भी मां के प्यार, परिवार की गर्माहट और अपनापन महसूस होता है।
यही वजह है कि यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि लोगों की भावनाओं का हिस्सा बन गया।
लता मंगेशकर की आवाज ने दी नई पहचान
लता मंगेशकर भारतीय संगीत की महान गायिकाओं में शामिल थीं। उनकी आवाज की मिठास और भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता ने इस भोजपुरी गीत को देशभर में पहचान दिलाई।
जब उन्होंने इस लोकगीत को अपनी आवाज दी तो इसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। आज भी लोग इसे सुनकर भावुक हो जाते हैं।
यूपी-बिहार के घरों में गूंजता रहा गीत
कई परिवारों में यह गीत बचपन की यादों से जुड़ा हुआ है। गांवों में त्योहारों, पारिवारिक कार्यक्रमों और खास मौकों पर ऐसे लोकगीतों की अलग ही पहचान रही है।
लोगों का कहना है कि इस गीत को सुनते ही उन्हें अपने बचपन, मां की गोद और घर के पुराने दिनों की याद आने लगती है।
लोकगीतों की विरासत को रखा जिंदा
भोजपुरी लोकसंगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत है। ऐसे गीत पीढ़ियों को जोड़ने का काम करते हैं और भाषा व संस्कृति की पहचान को मजबूत बनाते हैं।
लता मंगेशकर जैसी महान कलाकारों ने क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी कायम है लोकप्रियता
समय बदलने के बावजूद इस लोकगीत की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में भी लोग इसे सुनते हैं और अपनी पुरानी यादों से जुड़ते हैं।
यह गीत साबित करता है कि सच्चे भाव और मधुर संगीत से बने गीत कभी पुराने नहीं होते।