मुंबई: फिल्ममेकर नाग अश्विन का मानना है कि टेक्नोलॉजी के आसान होने से भारतीय सिनेमा के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे फिल्ममेकर शानदार विजुअल स्टोरीटेलिंग को देश की अनोखी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी कहानियों और सोच के साथ जोड़ सकते हैं।
क्या नाग अश्विन को लगता है कि भारतीय सिनेमा के लिए असली मौका टेक्नोलॉजी को हमारी अपनी खास कहानियों और सोच के साथ जोड़ने में है?
नाग अश्विन, जिनकी 2024 की फिल्म "कल्कि 2898 AD" ने 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 'बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट' और 'बेस्ट स्पेशल इफेक्ट्स' का अवॉर्ड जीता, ने IANS से कहा: "हां, बिल्कुल। मुझे लगता है कि टेक्नोलॉजी को हमारी अपनी खास कहानियों और सोच के साथ जोड़ने से भारतीय सिनेमा के लिए बहुत सारे मौके खुल सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ज़्यादा अलग-अलग तरह के लोगों को सशक्त बना सकती है और उनकी दुनिया को स्क्रीन पर ला सकती है।
फिल्ममेकर ने आगे कहा: "और यह टेक्नोलॉजी जितनी ज़्यादा आसान होगी, उतनी ही ज़्यादा अलग-अलग और ओरिजिनल आवाज़ों को बढ़ावा मिल सकेगा। इससे ज़्यादा लोग एक्सपेरिमेंट कर सकेंगे और अपनी कहानियों को अपने तरीके से कह सकेंगे, साथ ही उनके पास उन दुनियाओं को स्क्रीन पर साकार करने के लिए टेक्नोलॉजी भी होगी।"
"कल्कि 2898 AD" 2024 की एक भारतीय तेलुगु-भाषा की एपिक माइथोलॉजिकल साइंस-फिक्शन फिल्म है। इसमें अमिताभ बच्चन, कमल हासन, प्रभास, दीपिका पादुकोण, शोभना और दिशा पाटनी जैसे कई बड़े कलाकार शामिल हैं।
हिंदू धर्मग्रंथों से प्रेरित यह फिल्म 'कल्कि सिनेमैटिक यूनिवर्स' की पहली कड़ी है। साल 2898 AD में काशी शहर के एक डिस्टोपियन भविष्य पर आधारित यह कहानी एक ऐसे ग्रुप के बारे में है जो लैब सब्जेक्ट SUM-80 के अजन्मे बच्चे की रक्षा करने के मिशन पर है। माना जाता है कि यह बच्चा कल्कि है, जो विष्णु का आखिरी अवतार है।
नाग अश्विन की बात करें तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शेखर कम्मुला के असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की थी। उन्होंने 2015 में 'येवाडे सुब्रमण्यम' फिल्म से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू किया। उन्हें 2018 में एक्ट्रेस सावित्री की बायोपिक 'महानटी' को डायरेक्ट करने के लिए काफी तारीफ मिली।