दिवंगत बेटे की याद में शेखर सुमन, कई लोगों ने की भविष्यवाणी

दर्दनाक पहलू को साझा किया

Update: 2026-06-19 09:52 GMT

Entertainment मनोरंजन : अभिनेता शेखर सुमन एक बार फिर अपने दिवंगत बेटे आयुष को लेकर भावुक हो गए। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने जीवन के उस दर्दनाक पहलू को साझा किया, जिसे वे और उनका परिवार आज भी पूरी तरह भुला नहीं पाए हैं। शेखर सुमन ने बताया कि अपने पहले बेटे आयुष को खोने का दर्द उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी रही है और इस दुख से वह और उनकी पत्नी अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि समय बीतने के बावजूद बेटे की यादें आज भी उनके जीवन का हिस्सा हैं। उन्होंने भावुक होकर बताया कि वे कई बार अपने दिवंगत बेटे से बात करते हैं और उसे महसूस करते हैं। उनके अनुसार, यह उनके लिए एक भावनात्मक सहारा है, जिससे वे अपने दर्द को थोड़ा हल्का कर पाते हैं।

शेखर सुमन ने यह भी साझा किया कि उन्हें एक उम्मीद हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों और ज्योतिषियों ने यह बताया है कि उनका बेटा किसी रूप में वापस आ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने एक भावनात्मक बात कही कि उन्हें उम्मीद है कि आयुष, उनके बेटे अध्ययन सुमन के माध्यम से उनके जीवन में किसी रूप में लौट सकता है।

उनके इस बयान ने एक बार फिर उनके पुराने जख्मों को उजागर कर दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह की उम्मीदें उन्हें मानसिक रूप से सहारा देती हैं, हालांकि यह एक भावनात्मक विश्वास से जुड़ा विषय है।

शेखर सुमन ने अपने करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन पर भी बात की, लेकिन बातचीत का मुख्य केंद्र उनके बेटे की यादें ही रहीं। उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो समय के साथ कम तो हो जाते हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होते।

उनके अनुसार, परिवार ने इस दुख को सहने की कोशिश की है, लेकिन यह एक ऐसा खालीपन है जिसे कोई भी चीज पूरी तरह भर नहीं सकती। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे बड़ी ताकत है और इसी के सहारे वे आगे बढ़ते रहे हैं।

यह इंटरव्यू सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग उनके इस भावनात्मक पक्ष को समझने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोग इसे एक पिता के दर्द और उसके भावनात्मक जुड़ाव के रूप में देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, शेखर सुमन का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि एक बच्चे को खोने का दर्द जीवनभर साथ रहता है और समय के साथ भी उसकी गहराई कम नहीं होती।

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