मनोरंजन: संगीत की दुनिया में कई बार ऐसे गाने सामने आते हैं, जो अपनी अनोखी पहचान बना लेते हैं। कुछ गाने अपनी मधुर धुन, शानदार आवाज और बेहतरीन बोलों के कारण याद किए जाते हैं, तो कुछ अपनी अलग कहानी की वजह से लोगों के दिलों में बस जाते हैं। ऐसा ही एक गाना है फिल्म 'देव डी' का मशहूर गीत 'इमोशनल अत्याचार', जो पिछले 15 सालों से शादियों और पार्टियों की रौनक बना हुआ है। खास बात यह है कि इस गाने को किसी प्रोफेशनल सिंगर ने नहीं गाया था, बल्कि इसका स्क्रैच वर्जन ही इतना पसंद किया गया कि उसे फाइनल रिकॉर्डिंग के तौर पर इस्तेमाल कर लिया गया।
फिल्म 'देव डी' का यह गाना साल 2009 में रिलीज हुआ था और देखते ही देखते लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। शादी समारोहों में आज भी जब यह गाना बजता है तो लोग डांस करने से खुद को रोक नहीं पाते। हालांकि, इस गाने के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। इसे बनाने के दौरान किसी ने नहीं सोचा था कि एक मजाकिया अंदाज में तैयार किया गया स्क्रैच वर्जन इतना बड़ा हिट बन जाएगा।
'इमोशनल अत्याचार' को ब्रास बैंड स्टाइल में तैयार किया गया था, जो आमतौर पर शादी समारोहों में बजने वाले बैंड की तरह महसूस होता है। गाने के बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत अमित त्रिवेदी ने तैयार किया था। दोनों ने मिलकर इस गाने को एक अलग अंदाज देने की कोशिश की थी।
गाने की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसकी आवाज को लेकर शुरुआत में कोई बड़ा सिंगर तय नहीं किया गया था। अमित त्रिवेदी और अमिताभ भट्टाचार्य ने सिर्फ एक डेमो या स्क्रैच वर्जन तैयार करने के लिए इसे खुद गाया था। उनका मकसद केवल निर्देशक अनुराग कश्यप को यह समझाना था कि गाने का अंदाज कैसा होगा और इसे किस तरह पेश किया जा सकता है।
जब अनुराग कश्यप ने यह स्क्रैच वर्जन सुना तो उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे बदलने से साफ मना कर दिया। उन्हें लगा कि गाने में जो असली मस्ती और ऊर्जा है, वह इसी आवाज में है। इसके बाद तय हुआ कि इसी रिकॉर्डिंग को फिल्म में इस्तेमाल किया जाएगा।
अमित त्रिवेदी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह गाना उन्होंने और अमिताभ भट्टाचार्य ने मजे-मजे में रिकॉर्ड किया था। दोनों ने सोचा था कि बाद में किसी अच्छे सिंगर से इसे गवाया जाएगा, लेकिन अनुराग कश्यप को उनका अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने किसी और आवाज की जरूरत ही नहीं समझी।
इस गाने से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में गायकों की पहचान छिपाने के लिए फिक्शनल नाम का इस्तेमाल किया गया था। गाने के क्रेडिट में 'बैंडमास्टर रंगीला और रसीला' नाम दिया गया, जबकि असल में इसके पीछे अमित त्रिवेदी और अमिताभ भट्टाचार्य की आवाज थी।
अमिताभ भट्टाचार्य के लिए भी यह अनुभव थोड़ा अलग था। उस समय वह मुख्य रूप से गीतकार के तौर पर पहचान बना रहे थे और बतौर गायक शुरुआत को लेकर थोड़ा संकोच महसूस कर रहे थे। उन्हें डर था कि अगर यह गाना उनके सिंगिंग करियर की शुरुआत बनेगा तो लोग इसे किस तरह स्वीकार करेंगे। लेकिन समय के साथ यही गाना उनकी पहचान का एक खास हिस्सा बन गया।
फिल्म 'देव डी' के निर्देशक अनुराग कश्यप का विजन इस गाने को अलग बनाने में अहम रहा। उन्होंने 'इमोशनल अत्याचार' नाम और शादी वाले ब्रास बैंड अंदाज को चुना, जिसने इसे बाकी गानों से बिल्कुल अलग बना दिया।
आज 15 साल बाद भी यह गाना शादी समारोहों, पार्टियों और डांस फ्लोर की पहली पसंद बना हुआ है। इसकी लोकप्रियता यह साबित करती है कि कई बार गाने की सफलता के लिए बड़ी आवाज या महंगे प्रोडक्शन की जरूरत नहीं होती, बल्कि उसमें मौजूद असली मस्ती और भावनाएं लोगों को जोड़ देती हैं। 'इमोशनल अत्याचार' इसी बात का बेहतरीन उदाहरण है, जो बिना किसी बड़े सिंगर के भी एक कल्ट गाना बन गया।