बॉलीवुड अभिनेता नील नितिन मुकेश ने अपने दादाजी और महान प्लेबैक सिंगर मुकेश को उनकी 50वीं पुण्यतिथि पर भावुक अंदाज में याद किया। नील ने कहा कि भले ही वह अपने दादा मुकेश से कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल पाए, लेकिन परिवार और खासकर अपनी दादी की यादों के जरिए उन्हें हमेशा उनके करीब महसूस किया।
मुकेश हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गायकों में से एक रहे हैं। उनकी आवाज को राज कपूर की फिल्मों और कई अमर गीतों से खास पहचान मिली। 27 अगस्त 1976 को अमेरिका के डेट्रॉयट में एक कार्यक्रम के दौरान उनका निधन हो गया था।
दादी ने दादाजी को हमेशा जिंदा रखा
नील नितिन मुकेश ने बताया कि उनकी दादी सरल मुकेश ने कभी उन्हें अपने दादा की कमी महसूस नहीं होने दी। उन्होंने कहा कि दादी मुकेश जी की यादों और किस्सों को इस तरह साझा करती थीं कि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह अपने दादाजी से नहीं मिले।
नील ने बताया कि बचपन में वह अपनी दादी के घर जाकर पुरानी फिल्में देखते थे। वहां मौजूद ट्रॉफियां, तस्वीरें और मुकेश जी से जुड़ी चीजें उनके लिए किसी खजाने से कम नहीं थीं।

 

संगीत की विरासत को आगे बढ़ा रहा परिवार
मुकेश के बाद उनके बेटे नितिन मुकेश ने संगीत की विरासत को आगे बढ़ाया। नील नितिन मुकेश भी अपने परिवार की इस विरासत को बेहद गर्व के साथ देखते हैं।
नील का कहना है कि उनके दादाजी ने सिर्फ संगीत नहीं दिया, बल्कि प्यार और सम्मान की ऐसी विरासत छोड़ी जिसे आज भी परिवार और प्रशंसक महसूस करते हैं।
मुकेश के अमर गीत आज भी लोकप्रिय
मुकेश की आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में बसती है। ‘आवारा हूं’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’, ‘जीना यहां मरना यहां’ जैसे उनके कई गीत आज भी लोगों के पसंदीदा हैं।
नील नितिन मुकेश ने कहा कि उनके दादा की लोकप्रियता सिर्फ उनके गीतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सरल स्वभाव के कारण भी लोग उन्हें याद करते हैं।
नील का सपना है दादाजी की कहानी पर्दे पर लाना
नील नितिन मुकेश ने पहले भी इच्छा जताई है कि वह अपने दादा मुकेश की जिंदगी और संघर्ष की कहानी को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका मानना है कि मुकेश जी का सफर आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
मुकेश की 50वीं पुण्यतिथि पर नील की भावनाएं एक बार फिर दिखाती हैं कि महान कलाकारों की विरासत सिर्फ उनके काम में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की यादों में भी जीवित रहती है।
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