नई दिल्ली: अभिनेता और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखने वाले मुकेश खन्ना ने देश के राष्ट्रगान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि "वंदे मातरम" को भारत का राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए और "जन गण मन" की जगह इसे अपनाने पर विचार होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
मुकेश खन्ना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि "वंदे मातरम" भारत की भावना और स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार यह गीत देशभक्ति की भावना को दर्शाता है और हर भारतीय के मन में राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना पैदा करता है।
राष्ट्रगान को लेकर उठाया सवाल
मुकेश खन्ना ने "जन गण मन" को लेकर भी अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की संस्कृति और इतिहास को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि "वंदे मातरम" देश की मिट्टी और भावनाओं से ज्यादा जुड़ा हुआ है।
हालांकि भारत का राष्ट्रगान "जन गण मन" है, जिसे संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया था। वहीं "वंदे मातरम" को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।
वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व
"वंदे मातरम" की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। आज भी इसे देशभक्ति के प्रमुख गीतों में शामिल किया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हजारों लोगों ने इस गीत के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। इसी वजह से "वंदे मातरम" का भारतीय इतिहास में विशेष स्थान है।
बयान पर शुरू हुई चर्चा
मुकेश खन्ना के इस बयान के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचार का समर्थन कर रहे हैं और "वंदे मातरम" को राष्ट्रगान बनाने की मांग से सहमत नजर आ रहे हैं। वहीं कई लोगों का कहना है कि राष्ट्रगान को लेकर कोई भी बदलाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों का अपना अलग महत्व है। "जन गण मन" देश की आधिकारिक पहचान का हिस्सा है, जबकि "वंदे मातरम" स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ है।
पहले भी चर्चा में रहे हैं मुकेश खन्ना
मुकेश खन्ना अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह समय-समय पर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय पहचान को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। लोग राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों के महत्व को लेकर अपने-अपने विचार साझा कर रहे हैं।
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