मुंबई : दशहरा के अवसर पर अभिनेता मनीष वाधवा और अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल ने अपनी कमजोरियों से लड़ने और बेहतर इंसान बनने की कोशिशों पर बात की। दोनों ने त्योहार को आत्ममंथन का अवसर बताया।

मनीष के अनुसार, गुस्सा, ईर्ष्या और अहंकार जैसी भावनाओं पर नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “हम इंसान हैं भगवान नहीं”, इसलिए संकल्प के बावजूद गलतियां हो सकती हैं। उनका प्रयास रहता है कि सफलता का अहंकार काम पर हावी न हो और ध्यान अभिनय पर बना रहे।
समीक्षा ने बताया कि चुनौतीपूर्ण काम शुरू करने से पहले वह अपनी क्षमता पर संदेह करती थीं। तैयारी और अभ्यास से उनका भरोसा बढ़ा। अब वह कठिन काम से पीछे हटने के बजाय उसे छोटे चरणों में सीखने की कोशिश करती हैं।
उन्होंने दूसरों की राय सुनने और अपनी गलती मानने को जरूरी बताया। समीक्षा के मुताबिक, कलाकार की सफलता में पूरी टीम का योगदान होता है। इस बात को याद रखना उन्हें विनम्र बनाए रखता है। शूटिंग से समय मिलने पर वह परिवार के साथ त्योहार मनाना पसंद करती हैं।

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