'निशब्द' और 'गजनी' जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस जिया खान ने 10 साल पहले सुसाइड कर इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। 3 जून 2013 को जिया अपने फ्लैट में मृत पाई गई थीं। मामले में पुलिस ने एक्ट्रेस के बॉयफ्रेंड रहे एक्टर सूरज पंचोली को गिरफ्तार कर लिया था। घटना के 10 साल बाद अब इस पर फैसला आने वाला है। सुसाइड के बाद पुलिस को जिया के घर से 6 पेज का नोट मिला था। उस सुसाइड नोट में जिया ने सूरज पंचोली का जिक्र किया था। तो आइए जानते हैं एक्ट्रेस ने 6 पन्नों के आख‍िरी खत में क्या लिखा था।
खोने को कुछ भी नहीं बचा
जिया खान ने अपने नोट में लिखा था- 'पता नहीं, तुमसे ये बात कैसे कहूं। मगर अब खोने को कुछ भी नहीं बचा है। इसलिए सब कुछ बयां कर देने का यही सही वक्त है। वैसे भी मैं पहले ही सब कुछ खो चुकी हूं। अगर तुम इसे पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि मैं या तो जा चुकी हूं या इसकी तैयारी में हूं। अंदर से टूट चुकी हूं मैं। तुम्हें शायद इस बात का पता न हो, मगर तुम्हारा मुझ पर ऐसा असर था कि मैं टूटकर प्यार करने लगी और उस फेर में खुद को पूरी तरह भुला दिया, खो दिया। मगर तुम थे कि मुझे तड़पाते रहते थे, तकलीफ देते रहते थे, रोजाना।'
अंदर से मर चुकी हूं मैं
'अब मुझे अपनी जिंदगी में रौशनी की एक लकीर भी नहीं दिखती। सुबह आंख खुलती है, पर बिस्तर से उठने का मन नहीं करता। कभी ऐसे भी दिन थे, जब मैं बस अपना सब कुछ, अपना आने वाला कल तुम्हारे साथ में देखती थी। एक उम्मीद थी कि हम साथ होंगे। मगर तुमने मेरे उन सपनों को चूर चूर कर दिया। अब ऐसा लगता है कि जैसे अंदर से मर चुकी हूं मैं।'
प्यार में टूट चुकी थी एक्ट्रेस
एक्ट्रेस ने लिखा था- 'मैंने कभी किसी से इतना प्यार नहीं किया था। किसी की इतनी परवाह नहीं की थी। मगर मुझे बदले में क्या मिला। तुम्हारे झूठ, तुम्हारी बेवफाई। मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट लाती रही, तुम्हारी नजरों में खूबसूरत दिखने के लिए जतन करती रही, मगर तुम्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रेग्नेंट होने का डर बना रहता था। फिर भी बिना हिचक तुम्हें सब कुछ सौंप दिया. मगर तुमने इन सबके बदले मुझे तकलीफ दी। इस दर्द ने मुझे पूरी तरह से मार दिया। मेरी रूह तक तबाह हो गई।'
हर चीज मेरी पकड़ से छूट रही है
जिया ने लिखा था- 'अब हाल ये है कि न मैं खा पाती हूं, न सो पाती हूं। न सोच पाती हूं और न ही कुछ कर पाती हूं। हर चीज मेरी पकड़ से छूट रही है। करियर के बारे में तो अब सोचा भी नहीं जाता। जब मैं तुमसे पहली बार मिली थी, मेरे भीतर उत्साह था, उम्मीदें थीं और अनुशासन था। फिर मुझे तुमसे प्यार हो गया। मुझे लगा कि अब मेरे भीतर की सबसे शानदार खूबियों को दुनिया में पनाह मिलेगी। मुझे नहीं पता क्यों तकदीर हमें साथ और करीब लेकर आई। पहले ही इतनी तकलीफों, बलात्कारों, गालियों और यातनाओं को सहने के बाद मैं कम-से-कम इन सबकी हकदार तो नहीं थी।'
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