मनोरंजन : बॉलीवुड अभिनेत्री **तापसी पन्नू** की बहुप्रतीक्षित फिल्म **‘गांधारी’** नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर रिलीज से पहले काफी चर्चा थी, क्योंकि इसमें तापसी एक दमदार एक्शन अवतार में नजर आ रही हैं। कहानी एक ऐसी मां की है जो अपनी बेटी को बचाने के लिए हर हद पार करने को तैयार है। लेकिन फिल्म देखने के बाद सवाल उठता है कि क्या यह थ्रिलर दर्शकों को बांध पाती है? कई समीक्षाओं के मुताबिक, फिल्म का आइडिया मजबूत है, लेकिन कमजोर कहानी और स्क्रीनप्ले इसकी सबसे बड़ी कमी बन जाते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
‘गांधारी’ की कहानी **बानी (तापसी पन्नू)** नाम की एक मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी छोटी बेटी रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती है। बेटी की तलाश में निकली बानी एक बड़े अपराध नेटवर्क तक पहुंचती है।
कहानी में मां का दर्द, बदला और संघर्ष दिखाने की कोशिश की गई है। बेटी को वापस पाने के लिए बानी अपराधियों से भिड़ती है और एक खतरनाक सफर शुरू होता है। फिल्म में बच्चियों की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को भी शामिल किया गया है।
तापसी पन्नू का दमदार अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत तापसी पन्नू का अभिनय है। उन्होंने एक परेशान मां, गुस्से से भरी महिला और एक्शन करने वाली योद्धा के रूप में अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है।
तापसी के इमोशनल सीन और एक्शन सीक्वेंस फिल्म में जान डालते हैं। कई समीक्षकों का मानना है कि अगर फिल्म की कहानी मजबूत होती तो तापसी का प्रदर्शन इसे एक बेहतरीन थ्रिलर बना सकता था।
कहानी में कहां रह गई कमी?
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका लेखन बताया जा रहा है। शुरुआत में कहानी काफी दिलचस्प लगती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, घटनाएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
दर्शकों को उम्मीद रहती है कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आएगा, लेकिन कई जगह सस्पेंस जबरदस्ती जोड़ा हुआ महसूस होता है। फिल्म में कई ऐसे मौके आते हैं जहां रोमांच बढ़ सकता था, लेकिन कहानी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाती।
थ्रिलर के नाम पर अधूरा रोमांच
एक क्राइम थ्रिलर फिल्म से दर्शकों को तेज रफ्तार कहानी, मजबूत किरदार और शानदार ट्विस्ट की उम्मीद होती है। ‘गांधारी’ इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह सफल नहीं हो पाती।
फिल्म का विषय गंभीर है, लेकिन उसे जिस तरह पेश किया गया है उसमें गहराई की कमी महसूस होती है। कई समीक्षाओं में कहा गया कि फिल्म अपने मूल विचार का पूरा फायदा नहीं उठा पाती।
विलेन का किरदार भी कमजोर
फिल्म में विलेन का किरदार कहानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन वह उतना प्रभाव छोड़ नहीं पाता जितनी उम्मीद की गई थी।
एक मजबूत विरोधी किरदार कहानी में तनाव और रोमांच बढ़ा सकता था, लेकिन यहां विलेन की मौजूदगी दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं करती।
फिल्म का विजुअल और एक्शन कैसा है?
फिल्म का विजुअल टोन अच्छा है। कुछ एक्शन सीन और सिनेमैटोग्राफी प्रभावित करते हैं। तापसी ने एक्शन दृश्यों में मेहनत की है और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत नजर आती है।
लेकिन सिर्फ अच्छे एक्शन के सहारे पूरी फिल्म को संभालना मुश्किल हो जाता है। कहानी कमजोर होने के कारण एक्शन का असर भी सीमित रह जाता है।
‘गांधारी’ नाम क्यों रखा गया?
फिल्म का नाम महाभारत की गांधारी से प्रेरित है, लेकिन फिल्म उस प्रतीक को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। महाभारत की गांधारी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर पति के अंधेपन को साझा किया था।
वहीं फिल्म में बानी की आंखों और उसके संघर्ष को अलग संदर्भ में दिखाया गया है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि यह प्रतीक और बेहतर तरीके से कहानी में जोड़ा जा सकता था।
क्या फिल्म देखनी चाहिए?
अगर आप तापसी पन्नू के फैन हैं और एक्शन ड्रामा पसंद करते हैं तो फिल्म एक बार देखी जा सकती है। तापसी का अभिनय और कुछ भावनात्मक पल फिल्म को संभालते हैं।
लेकिन अगर आप एक जबरदस्त थ्रिलर, शानदार ट्विस्ट और मजबूत कहानी की उम्मीद कर रहे हैं तो फिल्म आपको निराश कर सकती है।
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