मनोरंजन : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बार फिर फर्जी वीडियो और डीपफेक कंटेंट का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक अभिनेत्री का कथित रूप से AI से तैयार किया गया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर अभिनेत्री और उनकी टीम ने लोगों से अपील की है कि वे इसे आगे शेयर या फॉरवर्ड न करें और किसी भी तरह के भ्रामक कंटेंट पर भरोसा न करें।
AI तकनीक ने जहां रचनात्मक कामों को आसान बनाया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासकर फिल्म और मनोरंजन जगत की हस्तियों को निशाना बनाकर बनाए गए डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे मामलों में कई बार कलाकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
AI वीडियो को लेकर अभिनेत्री ने जताई चिंता
वायरल वीडियो सामने आने के बाद अभिनेत्री ने अपने प्रशंसकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज वास्तविक नहीं होती और लोग बिना पुष्टि किए किसी भी वीडियो को साझा न करें।
अभिनेत्री की ओर से कहा गया कि AI तकनीक का इस्तेमाल करके किसी भी व्यक्ति की आवाज, चेहरा और हाव-भाव की नकल की जा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग डिजिटल कंटेंट को समझदारी से देखें और किसी भी संदिग्ध सामग्री को फैलाने से बचें।
क्या होता है AI डीपफेक वीडियो?
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो को बदलकर नया कंटेंट तैयार किया जाता है।
शुरुआत में इसका इस्तेमाल मनोरंजन और प्रयोगों के लिए किया जाता था, लेकिन अब इसका गलत उपयोग बढ़ गया है। अपराधी और शरारती तत्व इसका इस्तेमाल फर्जी वीडियो बनाने, अफवाह फैलाने और लोगों को बदनाम करने के लिए कर रहे हैं।
सेलिब्रिटीज क्यों बन रहे हैं निशाना?
फिल्मी सितारे और सार्वजनिक हस्तियां अक्सर डीपफेक वीडियो का शिकार बनती हैं क्योंकि उनकी तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
AI टूल्स की मदद से किसी भी व्यक्ति के चेहरे को दूसरे वीडियो पर लगाया जा सकता है। कई बार ऐसे वीडियो इतने वास्तविक दिखाई देते हैं कि आम लोगों के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है।
अभिनेत्रियों से जुड़े फर्जी वीडियो के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें सोशल मीडिया पर गलत और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने की कोशिश की गई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बढ़ी जिम्मेदारी
AI से बने फर्जी कंटेंट को रोकना सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। प्लेटफॉर्म लगातार ऐसे कंटेंट की पहचान और हटाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर हर सेकंड लाखों पोस्ट अपलोड होती हैं, इसलिए हर फर्जी वीडियो को तुरंत पकड़ना आसान नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूजर्स की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। अगर लोग संदिग्ध वीडियो को शेयर करना बंद कर दें तो फर्जी कंटेंट का असर काफी कम किया जा सकता है।
AI वीडियो की पहचान कैसे करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ संकेतों से AI से बने वीडियो को पहचाना जा सकता है।
* चेहरे के भाव असामान्य लग सकते हैं।
* आवाज और होंठों के हिलने में अंतर हो सकता है।
* वीडियो की क्वालिटी में अचानक बदलाव दिखाई दे सकता है।
* आंखों की गतिविधि या चेहरे की बनावट में गड़बड़ी नजर आ सकती है।
* वीडियो का स्रोत संदिग्ध हो सकता है।
हालांकि आधुनिक AI तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि हर बार केवल देखकर पहचानना आसान नहीं होता।
फर्जी वीडियो से बचने के लिए क्या करें?
सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो देखने के बाद तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी सच्चाई जांचना जरूरी है।
कुछ सावधानियां:
* अनजान अकाउंट से आए वीडियो को शेयर न करें।
* वीडियो का मूल स्रोत जांचें।
* आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जानकारी की पुष्टि करें।
* संदिग्ध कंटेंट की रिपोर्ट करें।
* निजी तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन साझा करते समय सावधानी बरतें।
कानून में क्या है प्रावधान?
भारत में किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल करना, फर्जी सामग्री बनाना या किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना कानूनी अपराध हो सकता है।
साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस और साइबर सेल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। पीड़ित व्यक्ति शिकायत दर्ज कराकर कानूनी मदद ले सकता है।
AI के फायदे और खतरे दोनों
AI तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और कई अन्य क्षेत्रों में सकारात्मक तरीके से किया जा रहा है। लेकिन जब यही तकनीक गलत हाथों में जाती है तो इससे गंभीर नुकसान हो सकता है।
डीपफेक वीडियो केवल किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि समाज में गलत जानकारी और भ्रम भी फैला सकते हैं।