मुंबई: दिवाली से पहले पटाखे जलाने को लेकर अभिनेत्री सोनी राजदान के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करने के बाद अभिनेत्री ने अब अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं थी, बल्कि बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर थी। अभिनेत्री ने विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य का मुद्दा उठाते हुए कहा कि साफ हवा में सांस लेना हर नागरिक का अधिकार है।
दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्री और आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने दिवाली से पहले सोशल मीडिया पर पटाखों के इस्तेमाल को लेकर एक पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने बढ़ते प्रदूषण के बीच पटाखे जलाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपने संदेश में पटाखे फोड़ने को जीवन और स्वास्थ्य के खिलाफ बताते हुए 'राष्ट्र-विरोधी' शब्द का भी इस्तेमाल किया था। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों ने इस बयान की आलोचना की और सवाल उठाया कि दिवाली पर पटाखे जलाने को राष्ट्र-विरोधी कैसे कहा जा सकता है। विवाद बढ़ने के बाद सोनी राजदान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात विस्तार से रखी।
सोनी राजदान ने स्पष्ट किया कि पटाखे जलाने या नहीं जलाने से किसी व्यक्ति की देशभक्ति तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य उन परिस्थितियों की ओर ध्यान दिलाना था, जिनमें प्रदूषण लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना रहा है। अभिनेत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ समय के आनंद के लिए पूरे समुदाय के स्वास्थ्य को खतरे में डालना जिम्मेदार व्यवहार नहीं माना जा सकता। अभिनेत्री ने उन लोगों को भी जवाब दिया, जो उनके पुराने बयान को धार्मिक मुद्दे के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर होने वाली हर चर्चा को धर्म से जोड़ना उचित नहीं है।
सोनी राजदान ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि यह मामला धर्म का नहीं, बल्कि हवा का है। उन्होंने बच्चों के बार-बार बीमार होने, प्रदूषण के कारण स्कूल नहीं जा पाने और सांस संबंधी परेशानियों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि वायु प्रदूषण का असर किसी विशेष धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रहता। इसकी चपेट में हर पृष्ठभूमि के लोग आते हैं। साफ हवा की जरूरत सभी को है। इसलिए पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को धार्मिक पहचान से अलग रखकर देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने मूल संदेश को गलत अर्थ में प्रस्तुत नहीं करने की अपील भी की।
सोनी राजदान ने कहा कि उनका उद्देश्य सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को सामने लाना था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रदूषण से प्रभावित होने वाले बच्चे किसी एक परिवार या समुदाय के नहीं, बल्कि पूरे समाज का हिस्सा हैं। इस विवाद की शुरुआत अभिनेत्री की उस इंस्टाग्राम पोस्ट से हुई थी, जिसमें उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब वायु प्रदूषण के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो ऐसे समय में पटाखे जलाना कितना उचित है।
उनकी पोस्ट में इस्तेमाल किए गए 'राष्ट्र-विरोधी' शब्द ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे दिवाली मनाने की परंपरा पर टिप्पणी के रूप में देखा, जबकि अभिनेत्री ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी चिंता केवल प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अभिनेत्री ने अपनी मूल इंस्टाग्राम पोस्ट पर कमेंट करने का विकल्प भी बंद कर दिया था। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अभिनेत्री दीया मिर्जा के दिवाली से जुड़े पर्यावरण जागरूकता वीडियो पर भी राजनीतिक बहस चल रही है। दरअसल, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने दिवाली के दौरान प्रदूषण कम करने का संदेश देने के लिए दीया मिर्जा का एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में लोगों से पर्यावरण के प्रति जागरूक रहते हुए त्योहार मनाने की अपील की गई थी।
इसके बाद कुछ भाजपा नेताओं ने वीडियो पर आपत्ति जताई थी। विवाद के बीच बीएमसी ने दीया मिर्जा वाला वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने पर्यावरण जागरूकता से जुड़े वीडियो को हटाए जाने और उस पर की गई कुछ राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों का असर सभी नागरिकों पर पड़ता है। हाईकोर्ट ने बीएमसी को वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश भी दिया।
सोनी राजदान की टिप्पणी इसी व्यापक विवाद के बीच सामने आई थी। उन्होंने पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी, लेकिन उनके शब्दों को लेकर विवाद बढ़ गया।
अब स्पष्टीकरण जारी कर अभिनेत्री ने यह साफ करने की कोशिश की है कि उनका विरोध किसी त्योहार या धार्मिक आस्था से नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। इस पूरे घटनाक्रम ने दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। जहां एक ओर लोग त्योहार मनाने की अपनी परंपराओं को महत्वपूर्ण मानते हैं, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों को लेकर भी जागरूकता बढ़ रही है। सोनी राजदान ने अपनी ताजा प्रतिक्रिया में इसी बात को प्रमुखता दी है कि साफ हवा में सांस लेने की जरूरत सभी को है और इस विषय को किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
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