New Delhi. नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ का टीज़र हाल ही में जारी किया गया है। संघ के शताब्दी वर्ष के साथ प्रस्तुत यह फिल्म उसके वैचारिक सफर, सामाजिक योगदान और राष्ट्र जीवन में निभाई गई भूमिका को सिनेमाई रूप में सामने लाने का प्रयास करती है। टीज़र सामने आते ही इस पर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और इसे लेकर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हलकों में खास उत्सुकता देखी जा रही है।
फिल्म को लेकर चर्चा उस समय और तेज हो गई, जब योग गुरु बाबा रामदेव के समर्थन के बाद अब बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने भी सार्वजनिक रूप से इसे समर्थन दिया। अजय देवगन जैसे लोकप्रिय अभिनेता का समर्थन मिलने से फिल्म को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने की संभावना और मजबूत हुई है। माना जा रहा है कि यह पहली ऐसी फिल्म है, जिसे संघ के वैचारिक परिवेश से खुला समर्थन मिल रहा है। अतीत में संघ को लेकर कई बार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री बनाने के प्रयास हुए, लेकिन ‘शतक’ को अब तक की सबसे व्यापक और संगठित सिनेमाई प्रस्तुति माना जा रहा है।
आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अजय देवगन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “आरएसएस के सौ साल पूरे होने पर ढेर सारी बधाइयाँ। इन सौ वर्षों में राष्ट्र निर्माण में संघ का बड़ा योगदान रहा है। इस यात्रा पर और रोशनी डालने आ रही है फिल्म #शतक। यह रही उसकी पहली झलक। शतक की पूरी टीम को मेरी ओर से शुभकामनाएँ।” उनके इस संदेश को हजारों लोगों ने साझा किया और फिल्म के प्रति रुचि और बढ़ गई।
इससे पहले फिल्म के गीत ‘भगवा है अपनी पहचान’ का विमोचन दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज में संपन्न हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक श्री भैयाजी जोशी की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। संघ मुख्यालय में गीत के विमोचन को फिल्म के प्रति संगठन के भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
टीज़र की शुरुआत प्रभावशाली पंक्ति से होती है—“यह एक ऐसे विचार की कहानी है, जिसे वर्षों से बार-बार मिटाने की कोशिश की गई।” यह पंक्ति साफ संकेत देती है कि फिल्म का उद्देश्य संघ को लेकर बनी पुरानी गलतफहमियों, आलोचनाओं और विवादों को ऐतिहासिक और तथ्यात्मक संदर्भ में प्रस्तुत करना है। टीज़र में उन संस्थापक और मार्गदर्शक व्यक्तित्वों को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिनका योगदान भारतीय समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जिन्हें व्यापक पहचान नहीं मिल सकी।
फिल्म में आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी माधव सदाशिवराव गोलवलकर की भूमिका और विचारधारा को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इसके साथ ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं के संदर्भ भी दिखाए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि फिल्म संघ को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र के ऐतिहासिक विकासक्रम के व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखती है। टीज़र में स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल जैसे निर्णायक दौरों में संघ की भूमिका की झलक भी दिखाई गई है।
फिल्म का निर्देशन आशीष मॉल ने किया है, जबकि इसके निर्माता वीर कपूर हैं। निर्माताओं के अनुसार, वर्ष 1875 से 1950 के बीच अस्तित्व में आए कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में संघ एकमात्र ऐसा संगठन है, जिसने बिना किसी व्यवधान के निरंतर अपनी यात्रा जारी रखी। इसी निरंतरता और संकल्प को फिल्म की टैगलाइन ‘न रुके, न थके, न झुके’ के माध्यम से दर्शाया गया है।
‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ को निस्वार्थ स्वयंसेवकों की पीढ़ियों को समर्पित एक श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का उद्देश्य केवल इतिहास को दिखाना नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को नई पीढ़ी के सामने रखना भी है। निर्माताओं का कहना है कि यह फिल्म सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रयासों की शक्ति को रेखांकित करती है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 19 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। संघ के शताब्दी वर्ष में रिलीज हो रही ‘शतक’ को लेकर समर्थकों और दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं, और माना जा रहा है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा और सामाजिक विमर्श में एक नई बहस को जन्म दे सकती है।