मिर्जापुर विवाद पर अभिषेक बनर्जी का जवाब हिंसा दिखाने पर दी सफाई
मिर्जापुर की हिंसा पर आलोचना
मुंबई: वेब सीरीज मिर्जापुर में हिंसा और अपराध के चित्रण को लेकर होने वाली आलोचनाओं पर अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब भी स्क्रीन पर हिंसा दिखाई जाती है, तो उसे लेकर सवाल उठते हैं। अभिषेक का कहना है कि ऐसी आलोचनाएं पहले भी कई फिल्मों और सीरीज को लेकर सामने आ चुकी हैं।
मिर्जापुर फ्रेंचाइजी में कंपाउंडर का किरदार निभाने वाले अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आलोचकों ने ऐसी ही बातें धुरंधर, एनिमल और पहले कई फिल्मों को लेकर भी कही थीं। उनके मुताबिक दर्शक स्क्रीन पर दिखाए जा रहे काल्पनिक संसार और वास्तविक जीवन के बीच अंतर समझते हैं।
हिंसा को लेकर उठते रहे हैं सवाल
मिर्जापुर अपनी कहानी, कड़े संवाद और हिंसक दृश्यों के लिए लंबे समय से चर्चा में रही है। सीरीज पर कई बार आरोप लगे कि इसमें हिंसा और अपराध को ग्लोरिफाई किया जाता है।
अभिषेक बनर्जी ने इन आरोपों पर कहा कि फिल्म या सीरीज में दिखाई जाने वाली हिंसा समाज में मौजूद वास्तविक घटनाओं से प्रेरित होती है। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर किसी दुनिया को दिखाना और उसे बढ़ावा देना दो अलग बातें हैं।
दर्शक समझदार हैं बोले अभिषेक
अभिषेक ने कहा कि दर्शक यह समझने में सक्षम हैं कि कौन-सी चीज मनोरंजन के लिए दिखाई जा रही है और कौन-सी वास्तविकता है।
उन्होंने कहा कि फिल्मों और सीरीज में काल्पनिक किरदारों और कहानियों के जरिए समाज के अलग-अलग पहलुओं को दिखाया जाता है। किसी भी कंटेंट को देखने का नजरिया हर दर्शक का अलग हो सकता है।
एनिमल और धुरंधर पर भी हुई थी बहस
रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल रिलीज के बाद हिंसा और पुरुषवादी सोच के चित्रण को लेकर काफी बहस में रही थी। फिल्म के समर्थकों और आलोचकों दोनों ने अपनी-अपनी राय रखी थी।
इसी तरह धुरंधर को लेकर भी हिंसा और कहानी के प्रस्तुतीकरण पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
अभिषेक बनर्जी ने इन्हीं उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार जब स्क्रीन पर हिंसा दिखाई जाती है तो इसी तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं।
मिर्जापुर की फिल्म को लेकर उत्साह
अभिषेक बनर्जी अब मिर्जापुर: द मूवी में नजर आने वाले हैं। सीरीज में उनका कंपाउंडर किरदार काफी लोकप्रिय हुआ था और दर्शकों के बीच उनकी अलग पहचान बनी।
उन्होंने कहा कि दर्शकों का प्यार ही किसी किरदार को यादगार बनाता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि बड़े पर्दे पर किसी लोकप्रिय सीरीज को लाना एक बड़ी चुनौती होती है।
स्क्रीन पर हिंसा दिखाने की चुनौती
अभिषेक के अनुसार कहानी की जरूरत के हिसाब से हिंसा को दिखाना पड़ता है, लेकिन इसका उद्देश्य हिंसा को बढ़ावा देना नहीं होता।
उन्होंने कहा कि रचनाकारों की जिम्मेदारी होती है कि वे कहानी को ईमानदारी से पेश करें। वहीं दर्शकों की समझ भी महत्वपूर्ण होती है कि वे कंटेंट को किस नजरिए से देखते हैं।
मिर्जापुर और उससे जुड़े कलाकारों को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि अपराध, हिंसा और मनोरंजन के बीच संतुलन हमेशा चर्चा का विषय रहा है।