मुंबई। अभिनेता अनिल कपूर की चर्चित फिल्म ‘नायक: द रियल हीरो’ ने अपनी रिलीज के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। फिल्म की सिल्वर जुबली के मौके पर अनिल कपूर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने यादगार किरदार शिवाजी राव को याद किया। अभिनेता ने बताया कि उन्हें इस भूमिका ने इसलिए आकर्षित नहीं किया था कि फिल्म में एक आम आदमी मुख्यमंत्री बन जाता है, बल्कि इसलिए कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल किस तरह करता है।

अनिल कपूर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म से जुड़ी यादें साझा करते हुए लिखा कि ‘नायक’ के 25 साल पूरे होना उनके लिए खास अवसर है। उन्होंने शिवाजी राव के किरदार को याद करते हुए कहा कि इस भूमिका की असली खासियत उसके मुख्यमंत्री बनने में नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों की भलाई के लिए किए गए कामों में थी।

सत्ता मिलने के बाद क्या किया, यही था आकर्षण

फिल्म में शिवाजी राव का किरदार एक ऐसे आम व्यक्ति का है, जो परिस्थितियों के चलते मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच जाता है। आम तौर पर फिल्म की चर्चा उसके इस असाधारण सफर को लेकर होती है, लेकिन अनिल कपूर के लिए कहानी का यह हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण नहीं था।

अपने पोस्ट में अभिनेता ने साफ किया कि उन्हें शिवाजी राव की भूमिका इसलिए पसंद आई क्योंकि सत्ता हासिल करने के बाद उसने अपनी ताकत को आम जनता के हित में इस्तेमाल किया। यानी किरदार की खासियत पद हासिल करने में नहीं, बल्कि पद की जिम्मेदारी को निभाने में थी।

यह सोच फिल्म की कहानी के मूल विचार से भी जुड़ी हुई है। ‘नायक’ में सत्ता को केवल अधिकार के तौर पर नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी के रूप में पेश किया गया है।

पत्रकार से मुख्यमंत्री बनने तक की कहानी

‘नायक: द रियल हीरो’ में अनिल कपूर ने शिवाजी राव नाम के पत्रकार की भूमिका निभाई थी। वह व्यवस्था की कमियों और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर सवाल उठाता है। एक विशेष परिस्थिति में उसे मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद शिवाजी राव सरकारी व्यवस्था को करीब से समझता है। इसके बाद वह भ्रष्टाचार, लापरवाही और आम लोगों की समस्याओं के खिलाफ कड़े फैसले लेने की कोशिश करता है। फिल्म में उसकी कार्यशैली पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों से अलग दिखाई गई है।

यही वजह है कि शिवाजी राव का किरदार दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाने में सफल रहा। एक तरफ वह आम आदमी की समस्याओं को समझता है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के रूप में व्यवस्था को बदलने की कोशिश करता है।

25 साल बाद भी याद किया जाता है किरदार

फिल्म को रिलीज हुए 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन शिवाजी राव का किरदार आज भी दर्शकों के बीच चर्चा में रहता है। सोशल मीडिया पर फिल्म के संवाद, दृश्य और किरदारों से जुड़े पोस्ट समय-समय पर वायरल होते रहते हैं।

फिल्म में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, प्रशासनिक लापरवाही और आम जनता की परेशानियों जैसे मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया गया था। इन विषयों की वजह से फिल्म की कहानी लंबे समय बाद भी दर्शकों को प्रासंगिक लगती है।

अनिल कपूर का मानना है कि शिवाजी राव की लोकप्रियता का एक कारण उसकी सोच भी है। वह सत्ता को अपने लिए इस्तेमाल करने के बजाय जनता के लिए बदलाव लाने का माध्यम बनाता है।

अनिल कपूर के करियर का यादगार रोल

शिवाजी राव का किरदार अनिल कपूर के फिल्मी करियर के यादगार पात्रों में गिना जाता है। उन्होंने इस भूमिका में एक आम आदमी की सहजता और मुख्यमंत्री के रूप में दृढ़ता दोनों को प्रभावी ढंग से पेश किया था।

किरदार के भीतर मौजूद गुस्सा, संवेदनशीलता और बदलाव की इच्छा को अभिनेता ने अपने अभिनय के जरिए पर्दे पर उभारा। यही वजह रही कि शिवाजी राव केवल फिल्म का पात्र नहीं रहा, बल्कि दर्शकों के बीच एक आदर्श राजनीतिक किरदार के रूप में भी याद किया गया।

फिल्म में मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवाजी राव जिस तरह फैसले लेता है, वह कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दर्शकों को यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि सत्ता में बैठे लोगों की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए।

फिल्म के संदेश को भी किया याद

फिल्म की 25वीं वर्षगांठ पर अनिल कपूर का नोट केवल पुरानी यादों तक सीमित नहीं रहा। उनके शब्दों में फिल्म के संदेश की झलक भी दिखाई दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिवाजी राव को मुख्यमंत्री बनने के कारण नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों की भलाई के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने के कारण पसंद किया गया।

यह बात फिल्म के केंद्रीय विचार को सामने लाती है कि किसी पद की अहमियत उसके अधिकारों में नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जिम्मेदारियों में होती है। शिवाजी राव के किरदार के जरिए इसी सोच को कहानी में प्रमुखता दी गई थी।

सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की प्रतिक्रिया

अनिल कपूर के पोस्ट के बाद फिल्म और उनके किरदार को लेकर प्रशंसकों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने फिल्म से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं और अभिनेता के अभिनय की सराहना की।

25 साल पहले आई इस फिल्म को आज भी याद किए जाने की एक वजह इसकी कहानी और किरदारों का प्रभाव है। विशेष रूप से शिवाजी राव का चरित्र दर्शकों को इसलिए आकर्षित करता है क्योंकि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के बाद भी व्यवस्था की कमियों से समझौता नहीं करता।

‘नायक’ की कहानी क्यों रही खास

फिल्म में एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनने की कल्पना को आधार बनाया गया था, लेकिन कहानी केवल राजनीतिक बदलाव तक सीमित नहीं रही। शिवाजी राव के फैसलों और उनके परिणामों के जरिए शासन व्यवस्था, भ्रष्टाचार और आम आदमी की परेशानियों को सामने रखा गया।

यही वजह है कि ‘नायक’ को केवल एक राजनीतिक फिल्म के तौर पर नहीं देखा गया। यह फिल्म व्यवस्था में बदलाव की इच्छा और सत्ता के सही इस्तेमाल की बहस को भी सामने लाती है।

25 साल बाद भी कायम है प्रभाव

‘नायक: द रियल हीरो’ के 25 वर्ष पूरे होने पर अनिल कपूर का शिवाजी राव को याद करना यह बताता है कि कुछ किरदार समय के साथ पुराने नहीं होते। वे अपनी सोच और संदेश के कारण दर्शकों के बीच बने रहते हैं।

अनिल कपूर के लिए भी यह किरदार इसलिए खास है क्योंकि इसमें सत्ता को व्यक्तिगत लाभ के बजाय जनहित से जोड़कर देखा गया। उन्होंने अपने पोस्ट में इसी बात को रेखांकित किया कि शिवाजी राव का मुख्यमंत्री बनना उतना महत्वपूर्ण नहीं था, जितना यह कि उसने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी शक्ति का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए किया।

25 साल बाद भी ‘नायक’ और शिवाजी राव का किरदार इसी वजह से दर्शकों की यादों में जीवित है। फिल्म की सालगिरह ने एक बार फिर इस चर्चित किरदार और उसके संदेश को चर्चा में ला दिया है।