अपराध की जांच में घटनास्थल की स्थिति और वहां मौजूद साक्ष्यों को समझना बेहद अहम होता है। अब थ्रीडी स्कैनिंग और डिजिटल मॉडल बनाने की तकनीक इस काम में नई संभावनाएं खोल रही है। इसकी मदद से घटनास्थल का ऐसा डिजिटल रूप तैयार किया जा सकता है, जिसे जांचकर्ता बाद में अलग-अलग कोणों से देख सकें। इस क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर भी काम हो रहा है। हालांकि, थ्रीडी मॉडल तैयार होना अपने आप में अपराध का पूरा घटनाक्रम साबित हो जाना नहीं है।
घटनास्थल का डिजिटल मॉडल बनाने के लिए एक से अधिक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें लेजर स्कैनिंग और अलग-अलग कोणों से ली गई तस्वीरों के आधार पर त्रिआयामी संरचना तैयार करना शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रीय न्याय संस्थान के एक अध्ययन में ड्रोन पर लगे कैमरे की द्विआयामी तस्वीरों से प्रायोगिक घटनास्थल का थ्रीडी मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया का मूल्यांकन किया गया है। इससे बड़े या मुश्किल पहुंच वाले स्थानों के दस्तावेजीकरण की संभावनाएं सामने आती हैं। 
लेजर स्कैनर वस्तुओं की सतह तक की दूरी और कोण दर्ज करके घटनास्थल का विस्तृत डिजिटल डेटा बनाते हैं। इससे तैयार मॉडल में वस्तुओं की स्थिति तथा उनके बीच की दूरी समझने में सहायता मिल सकती है। अमेरिकी राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसार, ऐसे उपकरणों की माप संबंधी क्षमता की जांच और उनका सही अंशांकन महत्वपूर्ण है। इसलिए मॉडल की उपयोगिता के साथ उसकी सटीकता का मूल्यांकन भी जरूरी होता है। 
इस तकनीक का एक बड़ा लाभ घटनास्थल को डिजिटल रूप में दोबारा देखने की सुविधा है। जांचकर्ता उपलब्ध डेटा के आधार पर निश्चित बिंदुओं के बीच दूरी और कुछ मामलों में गोली की संभावित दिशा जैसी विशेषताओं का अध्ययन कर सकते हैं। किसी स्थान की वास्तविक स्थिति बदल जाने के बाद भी पहले दर्ज किए गए विवरण विश्लेषण में उपयोगी हो सकते हैं। 
इस दिशा में भारत में भी प्रयोगात्मक काम के संकेत मिले हैं। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ से जुड़े एक सार्वजनिक परियोजना विवरण में ड्रोन से तस्वीरें लेकर AI और थ्रीडी पुनर्निर्माण के जरिए घटनास्थल की डिजिटल प्रतिकृति बनाने का उल्लेख है। विवरण में इसे विकासाधीन छात्र परियोजना बताया गया है। इसे व्यापक स्तर पर लागू पुलिस व्यवस्था मानना अभी उचित नहीं होगा। 
थ्रीडी तकनीक अदालत में घटनास्थल और साक्ष्यों को समझाने में भी उपयोगी हो सकती है। शोध में ऐसे दृश्य प्रस्तुतिकरण की सटीकता और विश्वसनीयता पर जोर दिया गया है। किसी मॉडल से निकाला गया निष्कर्ष कितना भरोसेमंद है, यह जांचना उतना ही आवश्यक है जितना आकर्षक डिजिटल दृश्य तैयार करना। अपराध की जांच में इसका वास्तविक योगदान साक्ष्यों को अधिक स्पष्ट ढंग से देखने और समझने में है।
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