जरा हटके: दुनिया में एक से एक रहस्यमयी मंदिर हैं, जिनकी कहानियां हैरान कर देती हैं. सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि हजारों साल पुराने ये मंदिर इतनी चीजें कैसे जानते हैं. कुछ की कहानी तो हमें भविष्य के बारे में भी बताती हैं. इन दिनों मिस्र के एक मंदिर की चर्चा खूब हो रही है. दरअसल, यहां मंदिर में एक रहस्यमयी पत्थर मिला है. दावा किया जा रहा है कि इस पत्थर पर देवताओं की भाषा लिखी हुई है. लोगों ने इसे मतलब भी बताए हैं, यकीन मानिए जानकर आप भी दंग रह जाएंगे.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्थर मिस्र के एक प्राचीन मंदिर में मिला था, जिसे रोसेटा स्टोन कहा जाता है. ब्रिटिश म्यूजियम में इस पत्थर को सहेजकर रखा गया है. पुरातत्वविदों के मुताबिक, यह पत्थर किंग टॉलेमी वी के युग का है और उन्हीं का आदेश इस शिलालेख पर लिखा गया है. किंग टॉलेमी वी ने 204-181 ईसा पूर्व तक टॉलेमिक मिस्र पर शासन किया था. बाद में इस शिलालेख की नकल की गई और पूरे मिस्र में सारे मंदिरों में इसी तरह के पत्थर लगाए गए.
रोसेटा स्टोन टूटा हुआ
एक फ्रांसीसी आदमी ने इसकी ट्रांसक्रिप्शन की और देवताओं की भाषा बताया. ट्रांसक्रिप्शन में चित्रलिपि में प्राचीन धर्मग्रंथ की 14 लाइनें लिखी गई हैं. इनसे सम्राट और देवताओं के बीच रिश्ते के बारे में जानकारी मिलती है. हालांकि, दुर्भाग्य की बात यह है कि रोसेटा स्टोन टूटा हुआ है और पूरा हिस्सा नहीं मिल पाया. साल 1882 में थॉमस यंग और जीन-फ्रांस्वा चैंपोलियन नाम के शख्स ने इस भाषा का कोड समझा था. इसका अनुवाद दुनिया के सामने रखा था. माना जाता है कि वे देवताओं की भाषा को समझने वाले पहले इंसान थे.
पृथ्वी पर भाषा अनुवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक
हाल ही में इसे @Jac5Connor एकाउंट से इसे एक्स (ट्विटर) पर शेयर किया गया. उन्होंने लिखा, रोसेटा पत्थर निस्संदेह पृथ्वी पर भाषा अनुवाद का सबसे महत्वपूर्ण मानव प्रतीक है. और कुछ भी इसके करीब नहीं है, क्योंकि इसने तुरंत हमें दो लुप्तप्राय भाषाओं को एक साथ समझने की अनुमति दे दी. मिस्र के प्राचीन खंडहरों में तीन शिलालेखों के टुकड़े मिले थे. इनमें से एक शिलालेख पर देवताओं की भाषा लिखी मानी गई है. दो अन्य शिलालेखों पर लैंग्वेज ऑफ तेह डॉक्यूमेंट्स और रोजमर्रा के उद्देश्य वाली कहानियां चित्रित की गई हैं.