10 दिनों से प्लास्टिक में फंसा था कुत्ते का सिर, बीएमसी ने तुरंत लिया एक्शन

प्लास्टिक इंसानों के लिए वरदान है, तो कुदरत के लिए जहर से कम नहीं

Update: 2021-08-04 11:31 GMT

प्लास्टिक इंसानों के लिए वरदान है, तो कुदरत के लिए जहर से कम नहीं! सालों-साल न मिटने वाला ये प्लास्टिक हर जगह (जल, जंगल और जमीन) फेल चुका है। समुद्री जीवों से लेकर राह चलते मवेशी इसका शिकार बन रहे हैं। यही वजह है कि पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर चिंतित है। लेकिन बहुत से लोग अब भी प्लास्टिक को यहां-वहां फेंक देते हैं, जिसके कारण जानवरों को मुसीबत का सामना करना पड़ता है। ताजा मामला भुवनेश्वर से है, जहां एक बेजुबान कुत्ता 10 दिन से प्लास्टिक के डिब्बे के साथ जी रहा था। दरअसल, वह डिब्बा उसके सिर में अटक गया था, जिसके साथ किसी इंसान के लिए दो मिनट भी गुजारना दर्दनाक मंजर से कम नहीं होगा!


ट्विटर यूजर देबाप्रसाद महाकुड़ (Debaprasad Mahakud) ने 2 अगस्त को यह तस्वीर शेयर की। उन्होंने कैप्शन में बताया, 'इस कुत्ते को बचाने में मदद करें। लगभग 10 दिन से प्लास्टिक का ये डिब्बा उसके सिर में अटका है। मैंने एनिमल हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने की बहुत सी कोशिशें कीं, लेकिन भुवनेश्वर सत्या नगर इलाके से कोई जवाब नहीं आया।'

देबाप्रसाद महाकुद का ट्वीट देखते ही 'भुवनेश्वर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन' (BMC) की रेस्क्यू टीम एक्शन मोड में आई और सत्या नगर पहुंची। जहां उन्होंने देखा कि एक कुत्ता इधर-उधर घूम रहा है, और उसके सिर में प्लास्टिक का डिब्बा फंसा है। बता दें, म्युनिसिपल कमिश्नर संजय सिंह ने ये पोस्ट देखी थी

बीएमसी रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई ने आज एक बेजुबान की जान बचा ली। देबाप्रसाद महाकुद नाम के एक एनिमल लवर से सूचना मिलने के बाद, बीएमसी ने अपनी रेस्क्यू टीम को तुरंत मौके पर भेज दिया। इसे हमारे संज्ञान में लाने के लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं।
बीएमसी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि डॉग को एक उपकरण की मदद से काबू में किया गया है। जबकि दूसरा शख्स ताकत से प्लास्टिक के डिब्बे को खींचकर डॉगी के सिर से अलग करते नजर आ रहा है। खबर लिखे जाने तक इस क्लिप को 3 हजार से अधिक व्यूज और दो सौ से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही, बहुत से लोग देबाप्रसाद और बीएससी रेस्क्यू टीम की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स उनकी आलोचना कर रहे हैं जो प्लास्टिक को यहां-वहां फेंक देते हैं।
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