युवराज मनचंदा केस पहुंचा अहम मोड़ पर, आज अदालत में होगी सुनवाई
शव की जल्द अंत्येष्टि पर जज ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: रियल एस्टेट कंपनी में कार्यरत 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की मौत के मामले में गुरुग्राम पुलिस की जांच और शव की पहचान से पहले किए गए अंतिम संस्कार पर साकेत कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल जैन ने गुरुग्राम पुलिस की जांच में खामियों पर टिप्पणी करते हुए पूछा कि शव की पहचान किए बिना उसका अंतिम संस्कार कैसे कर दिया गया। मामले में आज, 26 सितंबर को फिर सुनवाई होनी है और जांच अधिकारी तथा बादशाहपुर थाने के SHO को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लापता हुए थे। गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर इलाके के एक नाले से एक अज्ञात शव मिला था। बाद में इसकी पहचान युवराज के शव के रूप में हुई। लेकिन पहचान होने से पहले ही 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने युवराज की तस्वीर और उनकी जानकारी 12 सितंबर को ZIPNET पर अपलोड कर दी थी।
कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
साकेत कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज राहुल जैन ने गुरुग्राम पुलिस की जांच को लेकर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शव का पहले ही अंतिम संस्कार किए जाने के कारण जांच प्रभावित हुई है। कोर्ट ने पोस्टमार्टम और शव की पहचान से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए। युवराज की बहन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने अदालत में कहा कि गुरुग्राम पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबने के बाद दम घुटना बताया गया, जबकि दिल्ली पुलिस की जांच में आरोपियों द्वारा युवराज को गोली मारने का आरोप सामने आया है। कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कथित गोली की चोटों का उल्लेख नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं
अदालत के सामने यह भी आया कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं की गई थी। सुनवाई के दौरान जब अदालत ने पूछा कि गोली मारे जाने की बात कैसे साबित होगी, तो जांच अधिकारी ने बताया कि कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद किया गया है और उस पर मिले खून के निशानों का मिलान युवराज के रक्त से हुआ है। मामले में मेडिकल पुष्टि के लिए डॉक्टरों के बोर्ड से भी राय मांगी गई है।
परिवार ने मांगे रिकॉर्ड
युवराज की बहन ने अदालत में अर्जी दाखिल कर शव की बरामदगी, पहचान, पोस्टमार्टम, DNA नमूने, फॉरेंसिक रिपोर्ट, तस्वीरें, वीडियो, ZIPNET रिकॉर्ड, अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेज और शव से मिले सामान सहित विभिन्न रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पेश करने की मांग की थी। कोर्ट ने इससे संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को प्रमुख आरोपी बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि युवराज की हत्या के बाद शव को कार में रखा गया और बाद में बादशाहपुर इलाके के नाले में फेंक दिया गया। ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अब शनिवार की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने जांच अधिकारी और बादशाहपुर थाने के SHO को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने को कहा है। सुनवाई में गुरुग्राम पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम, शव की पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे जवाब मांगे जा सकते हैं।