नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली आने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। बताया जा रहा है कि शी जिनपिंग के साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा। ऐसे में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली में बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा से लेकर कूटनीतिक कार्यक्रमों तक की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। चीन के राष्ट्रपति की संभावित मौजूदगी सम्मेलन की कूटनीतिक अहमियत को और बढ़ा सकती है।

शी जिनपिंग के कार्यक्रम को दिया जा रहा अंतिम रूप

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है। चीन की ओर से औपचारिक घोषणा और कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के स्तर पर यात्रा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।

शी जिनपिंग के साथ आने वाले उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में चीन के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक शामिल हो सकते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विभिन्न वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने की स्थिति में भारतीय नेतृत्व के साथ उनकी मुलाकात पर भी नजर रहेगी। हालांकि किसी संभावित द्विपक्षीय बैठक के संबंध में अभी आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है।

भारत की अध्यक्षता में हो रहा सम्मेलन

इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। भारत मेजबान देश के रूप में सम्मेलन से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।

ब्रिक्स वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में संगठन के विस्तार के बाद इसकी वैश्विक भूमिका और प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा बढ़ी है।

सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वित्तीय व्यवस्था, वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों से जुड़े मुद्दे और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषय प्रमुखता से उठ सकते हैं। सदस्य देशों के नेता मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी अपने विचार रख सकते हैं।

भारत-चीन संबंधों पर रहेगी नजर

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा ऐसे समय होने जा रही है जब भारत और चीन के संबंधों पर दुनिया की निगाह बनी हुई है। दोनों देश एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और महत्वपूर्ण वैश्विक शक्तियों में शामिल हैं। व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे भी लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं।

ऐसे में शी जिनपिंग का भारत आना केवल ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित घटनाक्रम नहीं माना जाएगा। कूटनीतिक हलकों में इस बात पर भी नजर रहेगी कि सम्मेलन से इतर भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत होती है या नहीं।

यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक तय होती है तो दोनों देशों के संबंधों, सीमा पर शांति, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की संभावना बन सकती है। हालांकि ऐसी बैठक को लेकर फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे जिनपिंग

सूत्रों के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति अकेले नहीं बल्कि उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आएंगे। ऐसे प्रतिनिधिमंडल में विदेश नीति, आर्थिक मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन की ओर से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, विकासशील देशों की भूमिका और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे विषय उठाए जा सकते हैं। भारत भी अपनी अध्यक्षता के दौरान संगठन के भीतर व्यावहारिक सहयोग और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को सामने रखने पर जोर दे सकता है।

दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

विश्व के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। सम्मेलन स्थल, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के ठहरने वाले स्थानों और उनके आवागमन के मार्गों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाने की संभावना है।

सुरक्षा एजेंसियां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल के अनुसार तैयारियां करेंगी। दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। यातायात व्यवस्था को लेकर भी विशेष योजना बनाई जा सकती है ताकि सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके।

ब्रिक्स के मंच से दुनिया को संदेश

भारत के लिए यह सम्मेलन कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स के जरिए भारत विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उठाता रहा है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कई विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में से एक हो सकती है। उनकी यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम के सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वह भारत में कितने समय तक रहेंगे और ब्रिक्स की बैठकों के अलावा उनके कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे।

फिलहाल 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। शी जिनपिंग के दौरे को अंतिम रूप दिए जाने की खबरों के बीच अब चीन की औपचारिक पुष्टि और भारत की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम पर नजर बनी हुई है।

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