नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को वर्ष 2018 के मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी फैसले पर प्रसन्नता जताई और गांधीवादी विचारधारा के माध्यम से राजनीतिक संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया।वेणुगोपाल ने कहा, "गांधीवादी रास्ते पर चलकर लड़ेंगे, प्यार से उन्हें हराएंगे।" उनके इस बयान को कांग्रेस की अहिंसा और लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक मुकाबला करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में सोमवार को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में फैसला सुनाया गया। राहुल गांधी स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया।यह मामला वर्ष 2018 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से संबंधित था। अदालत ने माना कि संबंधित टिप्पणी मानहानि की श्रेणी में नहीं आती। शिकायतकर्ता के कानूनी अधिकार से जुड़ा पहलू भी फैसले में महत्वपूर्ण रहा।
केसी वेणुगोपाल ने जताई खुशी
राहुल गांधी के बरी होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। केसी वेणुगोपाल ने गांधीवादी विचारधारा का उल्लेख करते हुए राजनीतिक संघर्ष को प्रेम और अहिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ाने की बात कही।उनके बयान में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का संदेश दिखाई दिया। कांग्रेस लगातार महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और प्रेम के सिद्धांतों को अपनी राजनीतिक विचारधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है।इस फैसले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया। सुल्तानपुर अदालत परिसर के बाहर समर्थकों ने ढोल बजाकर और मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।
क्या था वर्ष 2018 का मानहानि मामला?
यह विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान वर्ष 2018 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी।इस बयान पर आपत्ति जताते हुए सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। विजय मिश्रा जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में अपनी दलीलें प्रस्तुत करते हुए आरोपों का विरोध किया।
लंबे समय से चल रही थी कानूनी प्रक्रिया
मानहानि मामले में राहुल गांधी को कई बार अदालत में उपस्थित होना पड़ा। फरवरी 2024 में उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद मामले में गवाहों के बयान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। पहले 13 अक्टूबर को निर्णय सुनाया जाना था, लेकिन बाद में तारीख बदलकर 26 अक्टूबर निर्धारित की गई।सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया।
शिकायतकर्ता पक्ष फैसले को दे सकता है चुनौती
अदालत के फैसले के बाद शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडे ने कहा कि वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी करेंगे।शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अलग निर्णय होना चाहिए था। वहीं, राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने की पुष्टि की।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह
राहुल गांधी को मानहानि मामले में बरी किए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं ने इसे राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत बताया।केसी वेणुगोपाल के गांधीवादी रास्ते पर चलने वाले बयान ने भी राजनीतिक चर्चा को आगे बढ़ाया है। फिलहाल राहुल गांधी को इस मामले में अदालत से राहत मिल गई है, हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना बनी हुई है।