नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही और दोपहर के भोजन से पहले के सत्र में कोई महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो सका। लगातार जारी शोर-शराबे के बीच सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
हंगामे की शुरुआत उस समय हुई जब विपक्षी सांसदों ने राजधानी दिल्ली में NEET प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सख्ती बरती और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर बर्बर व्यवहार किया गया।
विपक्षी सांसदों ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद होकर इस मामले पर बयान दें और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें। विपक्ष का कहना था कि छात्रों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और सरकार को जवाब देना चाहिए।
हंगामे के बीच राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। उन्होंने शून्य काल (Zero Hour) में सूचीबद्ध मुद्दों पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा, लेकिन विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा।
विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। सदन में लगातार शोर-शराबा होने के कारण सभापति के लिए कार्यवाही आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इसके बाद उन्होंने सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करने का निर्णय लिया।
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रश्न पत्र लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। वे इस मामले में विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
वहीं, सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली को लेकर उठाए गए मुद्दों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, संसद में विपक्ष इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है।
मंगलवार की घटना ने एक बार फिर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया। पिछले कुछ समय से NEET विवाद संसद में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।
राज्यसभा में शून्य काल का समय सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें वे तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाते हैं। लेकिन मंगलवार को हंगामे के कारण इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
संसदीय कार्यवाही में व्यवधान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी दलीलें हैं। सत्ता पक्ष अक्सर विपक्ष पर सदन का समय बर्बाद करने का आरोप लगाता है, जबकि विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विरोध जरूरी है।
NEET विवाद के अलावा संसद के मानसून सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सभी की नजरें दोपहर बाद होने वाली बैठक पर थीं। विपक्ष की मांग और सरकार के रुख के बीच NEET मामले को लेकर संसद में आगे भी हंगामा जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, छात्रों से जुड़े मुद्दे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का सवाल आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही पर असर डाल सकता है। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने पर ही सदन का कामकाज सामान्य रूप से आगे बढ़ पाएगा।