नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर हंगामा हुआ, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच संसदीय नियमों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। स्थिति इतनी गरमा गई कि खड़गे ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें संसदीय नियम सिखाने की जरूरत नहीं है और सदन में क्या बोलना है, यह उनका अधिकार है। लगातार हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ और अंततः सभापति को कार्यवाही दोपहर 2:15 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य पहले से तय रणनीति के तहत गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग पर अड़े रहे। विपक्ष का कहना था कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए। विपक्ष का दावा था कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है।
एक बार स्थगन के बाद जब दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में बुलाने के लिए निर्देश दिए जाएं। इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष अपनी मांग रख सकता है, लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि किस दिन कौन-सा मंत्री सदन में उपस्थित रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष किसी नियम का उल्लेख किए बिना सीधे आसन को निर्देश देने का प्रयास कर रहे हैं।
रिजिजू की इस टिप्पणी पर मल्लिकार्जुन खड़गे नाराज हो गए। उन्होंने सभापति की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि क्या अब उन्हें किरेन रिजिजू से संसदीय नियम सीखने पड़ेंगे। खड़गे ने कहा कि वे स्वयं नियमों से भलीभांति परिचित हैं और वर्षों से संसद का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन में कौन-सा विषय उठाना है, कब बोलना है और किस प्रकार अपनी बात रखनी है, यह उनका संवैधानिक और संसदीय अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी के लिखे हुए भाषण को पढ़ने के लिए बाध्य नहीं हैं और अपनी तैयारी के आधार पर ही सदन में बोलते हैं।
स्थिति को संभालने के लिए सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने बीच में हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष ने किसी प्रकार का निर्देश नहीं दिया, बल्कि केवल अनुरोध किया है। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि विपक्ष की भावना को सरकार और विशेष रूप से गृह मंत्री तक पहुंचाना उनका दायित्व है। इस पर किरेन रिजिजू ने आश्वासन दिया कि वह विपक्ष की मांग गृह मंत्री तक पहुंचा देंगे।
इस दौरान खड़गे ने कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय कार्य मंत्री ने पवन खेड़ा का नाम लेकर उनका अपमान किया है। अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए खड़गे ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के राज्यसभा में दिए गए एक पुराने वक्तव्य का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में व्यवधान और प्रक्रिया संबंधी प्रश्न उठाना संसदीय परंपरा का हिस्सा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है तो सरकार जवाब देने से बचती है।
वहीं किरेन रिजिजू ने अपने जवाब में कहा कि सभापति लगातार नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर दे रहे हैं, लेकिन वे बार-बार एक ही विषय उठा रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा के नियम 240 का हवाला देते हुए कहा कि कोई सदस्य एक ही मुद्दे को बार-बार नहीं उठा सकता, यदि वह पहले ही आसन की अनुमति से उस पर अपनी बात रख चुका हो।
इस बीच विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे और कई अन्य सदस्य भी व्यवस्था का प्रश्न उठाने की कोशिश करते रहे। हंगामे के कारण प्रश्नकाल सुचारु रूप से नहीं चल सका। सभापति ने कई बार सभी सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। अंततः लगातार व्यवधान को देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया। विपक्ष जहां गृह मंत्री की उपस्थिति और छात्रों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं सरकार संसदीय नियमों का हवाला देते हुए सदन की कार्यवाही को निर्धारित एजेंडे के अनुसार चलाने पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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