जेल में परिवार से जुड़ सकेंगे उमर खालिद, हफ्ते में दो बार वीडियो कॉल

Update: 2026-07-15 12:47 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में आरोपित और जेल में बंद उमर खालिद को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें अपने परिवार के सदस्यों से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल यानी ई-मुलाकात करने की अनुमति दे दी है। यह सुविधा पहले मई 2026 से घटाकर सप्ताह में केवल एक बार कर दी गई थी, जिसको लेकर उमर खालिद ने अदालत का रुख किया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने उमर खालिद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि खालिद पिछले छह वर्षों से लगातार सप्ताह में दो बार ई-मुलाकात की सुविधा का इस्तेमाल कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने जेल नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया। ऐसे में उन्हें पहले की तरह सप्ताह में दो वीडियो कॉल की अनुमति दी जानी चाहिए।

उमर खालिद की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी थी कि मई 2026 से बिना किसी स्पष्ट कारण के उनकी वीडियो कॉल की सुविधा को कम कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की ओर से यह बदलाव किया गया, जबकि खालिद लंबे समय से नियमों का पालन करते हुए इस सुविधा का लाभ उठा रहे थे।

याचिका में कहा गया था कि परिवार से बातचीत करना बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के लिए जरूरी है। लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदियों के लिए परिवार से संपर्क बनाए रखना एक महत्वपूर्ण मानवीय जरूरत होती है। वकील ने अदालत से मांग की थी कि पहले की व्यवस्था को बहाल किया जाए और सप्ताह में दो बार वीडियो मीटिंग की अनुमति दी जाए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान जेल रिकॉर्ड और संबंधित तथ्यों पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि उमर खालिद ने अब तक जेल नियमों का पालन किया है और उनके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है, जिसके आधार पर वीडियो कॉल की सुविधा सीमित की जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई बंदी लंबे समय से बिना किसी उल्लंघन के इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहा है, तो उसे अचानक कम करने के लिए उचित कारण होना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने उमर खालिद को दो साप्ताहिक ई-मुलाकात की अनुमति देने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि उमर खालिद दिल्ली दंगा मामले में आरोपी हैं और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों की जांच के दौरान कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।

कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उमर खालिद अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर सकेंगे। अदालत का यह आदेश फिलहाल केवल ई-मुलाकात की सुविधा से संबंधित है और इससे उनके मुकदमे की अन्य प्रक्रियाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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