मोदी सरकार की कार्रवाई पर थरूर ने जताई संतुष्टि दूसरे देशों से की तुलना
दिल्ली : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े विवाद और सरकार की कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मोदी सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों को जिस तरह संभाला गया, वह कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। थरूर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रखते हुए कुछ देशों के हालात से इसकी तुलना भी की।
दरअसल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया पर शुरू हुआ अभियान काफी चर्चा में आ गया था। यह एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आया, जिसने कम समय में बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस अभियान को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई थी और अलग-अलग दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखी थी।
शशि थरूर ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र में असहमति और लोगों की आवाज से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों और आलोचनाओं के लिए जगह होनी चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी असंतोष को दबाने के बजाय उसे समझने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश होनी चाहिए।
थरूर ने इस मुद्दे पर दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर सरकारें आलोचनात्मक आवाजों और ऑनलाइन आंदोलनों पर कड़े प्रतिबंध लगा देती हैं। इसके मुकाबले भारत में इस तरह के मामलों को लेकर बहस और चर्चा की गुंजाइश बनी रहती है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दौर में लोगों की राय तेजी से सामने आती है। ऐसे प्लेटफॉर्म कई बार सरकारों और राजनीतिक दलों के लिए जनता की भावनाओं को समझने का माध्यम बन सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी अभियान को कानून के दायरे में रहकर ही चलाया जाना चाहिए।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर पहले भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। कुछ लोगों ने इसे युवाओं की नाराजगी और व्यंग्य के रूप में देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसके पीछे की मंशा और प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
शशि थरूर के बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस नेता का कहना है कि लोकतंत्र में व्यंग्य और आलोचना की भूमिका होती है। वहीं दूसरी ओर सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।
भारत में सोशल मीडिया आधारित अभियानों का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। कई बार छोटे ऑनलाइन अभियान बड़े राजनीतिक मुद्दों में बदल जाते हैं। ऐसे में सरकार, विपक्ष और आम जनता सभी की नजरें इन गतिविधियों पर रहती हैं।
थरूर ने लोकतंत्र की तुलना एक ऐसे तंत्र से की जिसमें असंतोष को बाहर निकलने का रास्ता मिलना चाहिए। उनका मानना है कि अगर लोगों की नाराजगी को सुनने के बजाय नजरअंदाज किया जाए तो समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी, सोशल मीडिया की ताकत और सरकार की जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऑनलाइन अभियानों की सीमाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
फिलहाल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। शशि थरूर की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है और अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।