ज्ञान और संस्कार से भविष्य संवारते हैं शिक्षक पीएम मोदी ने साझा किया संदेश
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर में शिक्षकों के योगदान को याद किया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस खास अवसर पर देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति के शिक्षक दिवस संदेश को साझा करते हुए शिक्षकों के योगदान को सम्मान दिया। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षक अपने मार्गदर्शन और मेंटरशिप के जरिए विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने और उनके चरित्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस उनकी जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन स्वयं एक असाधारण शिक्षक थे और उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र एवं समाज के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना।
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से बदलते समय के साथ अपने ज्ञान को लगातार अपडेट करने, नई तकनीकों को अपनाने और शिक्षण के नए तरीकों का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और सवाल पूछने की भावना विकसित करना भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं व्यक्तित्व भी गढ़ते हैं
राष्ट्रपति मुर्मू के संदेश का मुख्य केंद्र शिक्षक और विद्यार्थी के बीच का वह रिश्ता रहा जो केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहता।
उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने मार्गदर्शन से प्रतिभा को निखारने के साथ विद्यार्थियों के चरित्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक समर्पित और संवेदनशील शिक्षक विद्यार्थी के अंदर छिपी विशिष्ट क्षमता को पहचान सकता है।
हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। कोई पढ़ाई में बेहतर होता है तो किसी की रुचि खेल, कला, विज्ञान, तकनीक या किसी दूसरे क्षेत्र में हो सकती है।
ऐसी स्थिति में शिक्षक की भूमिका केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने तक सीमित नहीं रहती। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी की वास्तविक क्षमता पहचानकर उसे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है।
अच्छे इंसान बनाने की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्वपूर्ण बताया।
उनके मुताबिक शिक्षकों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को अच्छे इंसान बनने की दिशा दिखाने की भी है। इसका मतलब है कि शिक्षा केवल सूचना या डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया भी है।
ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का हिस्सा बनें, इसमें परिवार के साथ शिक्षक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यही कारण है कि भारतीय समाज में शिक्षक को हमेशा विशेष सम्मान दिया गया है।
शिक्षक दिवस पर डॉ. राधाकृष्णन को नमन
भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है।
डॉ. राधाकृष्णन एक प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और शिक्षाविद थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए उनकी जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके शिक्षक के रूप में योगदान को याद किया।
शिक्षक दिवस आज केवल डॉ. राधाकृष्णन की स्मृति तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर के उन लाखों शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है जो विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने का काम करते हैं।
समय के साथ ज्ञान अपडेट करें शिक्षक
राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षकों के सामने बदलते दौर की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षकों से लगातार अपने ज्ञान को अपडेट करते रहने की अपील की।
आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इंटरनेट, डिजिटल क्लासरूम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों ने सीखने और सिखाने के तरीकों को प्रभावित किया है।
अब विद्यार्थी केवल किताबों से जानकारी हासिल नहीं करते। उनके पास इंटरनेट के जरिए बड़ी मात्रा में जानकारी उपलब्ध है।
ऐसे माहौल में शिक्षक की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि विद्यार्थियों को यह समझाना भी जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी में क्या सही है, क्या गलत है और उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कैसे किया जाए।
तकनीक अपनाने का दिया संदेश
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील की।
डिजिटल शिक्षा के विस्तार के बाद शिक्षकों के लिए तकनीक को समझना और उसका प्रभावी इस्तेमाल करना आवश्यक होता जा रहा है।
स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म और दूसरे तकनीकी साधन पढ़ाई को अधिक रोचक बना सकते हैं।
लेकिन तकनीक का उद्देश्य शिक्षक की भूमिका कम करना नहीं बल्कि उन्हें ज्यादा प्रभावी साधन उपलब्ध कराना है।
एक शिक्षक तकनीक और अपने अनुभव को मिलाकर विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का वातावरण दे सकता है।
इनोवेटिव टीचिंग पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षकों से शिक्षण के नए और अभिनव तरीकों को अपनाने की बात भी कही।
पारंपरिक तरीके से केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाने के बजाय उदाहरण, प्रयोग, गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभव के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाए तो उनकी समझ बेहतर हो सकती है।
खासकर विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में प्रयोग आधारित शिक्षा बच्चों की जिज्ञासा बढ़ा सकती है।
हर बच्चा एक ही तरीके से नहीं सीखता। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार अपने शिक्षण के तरीके में बदलाव करने की जरूरत होती है।
स्वतंत्र सोच विकसित करना जरूरी
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
शिक्षा का उद्देश्य केवल किताब में लिखी जानकारी याद करवाना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को किसी विषय पर खुद सोचने, सवाल करने और अपने निष्कर्ष तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।
अगर बच्चे केवल परीक्षा पास करने के लिए तथ्यों को याद करेंगे तो उनकी रचनात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएगी।
इसके विपरीत सवाल पूछने और अलग-अलग दृष्टिकोण से किसी समस्या को समझने की आदत उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकती है।
बच्चों में पैदा करें जिज्ञासा
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा की भावना विकसित करने का भी आह्वान किया।
बच्चे स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु होते हैं। वे अपने आसपास की चीजों को देखकर सवाल पूछते हैं। अच्छी शिक्षा व्यवस्था उस जिज्ञासा को दबाने के बजाय बढ़ावा देती है।
शिक्षक अगर बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करते हैं तो वे सीखने की प्रक्रिया में ज्यादा सक्रिय होते हैं।
यही जिज्ञासा आगे चलकर वैज्ञानिक सोच, नवाचार और नई खोजों का आधार बन सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान को रेखांकित किया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदेश को साझा किया।
प्रधानमंत्री मोदी शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका को लेकर लगातार संवाद करते रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से मुलाकात की और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों का विद्यार्थियों से जुड़ाव केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और व्यक्तित्व को विकसित करने में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से मिले मोदी
शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से बातचीत की।
इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षकों ने अपने अनुभव और नवाचार प्रधानमंत्री के साथ साझा किए।
प्रधानमंत्री ने शिक्षा को रोचक बनाने, विद्यार्थियों को नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करने और तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उन शिक्षकों को सम्मानित करने का माध्यम है जिन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नवाचार करने या विद्यार्थियों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाने का काम किया है।
किताबों से आगे बढ़कर बच्चों से जुड़ने की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों के साथ संवाद में बच्चों से किताबों के दायरे से आगे जाकर जुड़ने पर जोर दिया।
आज बच्चों के सामने पढ़ाई के अलावा डिजिटल दुनिया से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों की दिनचर्या और सीखने की आदतों को प्रभावित किया है।
ऐसे में शिक्षक विद्यार्थियों को खेल, रचनात्मक गतिविधियों और दूसरे सकारात्मक कार्यों से जोड़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई और शिक्षकों से इस दिशा में जागरूक भूमिका निभाने की बात कही।
शिक्षक विद्यार्थी का मेंटर भी
राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश शिक्षक की भूमिका को एक मेंटर के रूप में भी स्थापित करता है।
विद्यार्थी के जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब उसे केवल विषय की जानकारी नहीं बल्कि सही निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
एक संवेदनशील शिक्षक विद्यार्थी की परेशानी को समझ सकता है और उसे सही दिशा दिखा सकता है।
स्कूल और कॉलेज के वर्षों में मिला ऐसा मार्गदर्शन कई बार व्यक्ति के पूरे जीवन पर असर डालता है।
यही कारण है कि वर्षों बाद भी लोग अपने उन शिक्षकों को याद रखते हैं जिन्होंने किसी कठिन समय में उनका आत्मविश्वास बढ़ाया या उनकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बदलती दुनिया के लिए बच्चों को करना होगा तैयार
21वीं सदी में रोजगार और कौशल की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में कई नए प्रकार के रोजगार पैदा होंगे।
ऐसे भविष्य के लिए विद्यार्थियों को केवल मौजूदा पाठ्यक्रम पढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
उनमें समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, टीमवर्क और संवाद जैसे कौशल विकसित करना भी जरूरी होगा।
यहां शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
ज्ञान के साथ मूल्य भी जरूरी
तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, मानवीय मूल्यों की जरूरत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है।
विद्यार्थी तकनीकी रूप से कितना भी सक्षम क्यों न हो, अगर उसमें सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक समझ नहीं है तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
इसलिए ज्ञान के साथ मूल्यों का संचार भविष्य की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिक्षक अपने व्यवहार से भी बच्चों को बहुत कुछ सिखाते हैं। शिक्षक की समय की पाबंदी, ईमानदारी, संवेदनशीलता और सभी विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार बच्चों के लिए व्यावहारिक शिक्षा बन सकता है।
शिक्षक बनाते हैं देश का भविष्य
किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है और उस पीढ़ी के निर्माण में शिक्षकों की सीधी भूमिका होती है।
आज स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा आने वाले वर्षों में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, किसान, उद्यमी, कलाकार, शिक्षक या प्रशासक बन सकता है।
उसके जीवन के शुरुआती वर्षों में शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान और मार्गदर्शन उसके निर्णयों और व्यक्तित्व पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है।
इसी कारण शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी या एक कक्षा तक सीमित नहीं होता बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र तक पहुंचता है।
राष्ट्रपति ने शिक्षकों के प्रति जताया आभार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में देश के सभी समर्पित शिक्षकों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कामना की कि शिक्षक ऐसी प्रबुद्ध पीढ़ियों का निर्माण करें जो देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
यह संदेश शिक्षक दिवस के मूल उद्देश्य को भी सामने रखता है। यह दिन केवल शिक्षकों को शुभकामना देने का अवसर नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को समझने का भी दिन है।
शिक्षक दिवस का बड़ा संदेश
शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेशों का केंद्र विद्यार्थियों का समग्र विकास रहा।
एक तरफ राष्ट्रपति ने शिक्षकों से ज्ञान को लगातार अपडेट करने, तकनीक और नवाचार अपनाने तथा बच्चों में स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा विकसित करने का आह्वान किया। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से किताबों के दायरे से आगे बढ़कर बच्चों के व्यक्तित्व, रचनात्मकता और जीवन से जुड़ने पर जोर दिया।
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में शिक्षक की जिम्मेदारी भी बदल रही है। अब शिक्षक केवल जानकारी देने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और मेंटर है।
ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों का संचार करके शिक्षक ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ सामाजिक और नैतिक रूप से जिम्मेदार भी हो।
शिक्षक दिवस का यही सबसे बड़ा संदेश है कि किसी राष्ट्र के भविष्य का निर्माण केवल स्कूल की इमारतों या पाठ्यपुस्तकों से नहीं होता। उसके केंद्र में वे शिक्षक होते हैं जो हर दिन कक्षा में बच्चों की प्रतिभा पहचानते हैं, उन्हें सवाल पूछना सिखाते हैं और बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करते हैं।