नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग (DoT) ने फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी करने, दूरसंचार पहचान से जुड़ी जानकारी के गलत इस्तेमाल और मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ को लेकर लोगों को सावधान किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दूरसंचार से जुड़े पहचान नंबरों और उपकरणों की पहचान में धोखाधड़ी गंभीर अपराध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

दूरसंचार विभाग की ओर से जारी चेतावनी में कहा गया है कि गलत या फर्जी दस्तावेज के आधार पर सिम हासिल करना अथवा किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर सिम कार्ड लेना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसी तरह किसी व्यक्ति की दूरसंचार पहचान का धोखाधड़ी से इस्तेमाल करना भी गंभीर मामला है। विभाग ने उपभोक्ताओं और दूरसंचार सेवाओं से जुड़े लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की है।

आज के समय में मोबाइल नंबर व्यक्ति की डिजिटल पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। बैंक खाते, यूपीआई, सोशल मीडिया, ई-मेल, सरकारी सेवाओं और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मोबाइल नंबर का इस्तेमाल सत्यापन के लिए किया जाता है। ऐसे में किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर जारी किया गया सिम साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। धोखाधड़ी करने वाले कई मामलों में अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर जारी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे नंबरों के जरिए फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड और अन्य साइबर अपराध किए जा सकते हैं। इसी वजह से सरकार ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और ग्राहक सत्यापन से जुड़े नियमों को सख्त किया है।

दूरसंचार विभाग ने आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ को लेकर भी चेतावनी दी है। आईएमईआई यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी प्रत्येक मोबाइल उपकरण से जुड़ी विशिष्ट पहचान होती है। मोबाइल नेटवर्क पर किसी डिवाइस की पहचान में इसका महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है। चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन की पहचान और उन्हें ब्लॉक करने की प्रक्रिया में भी आईएमईआई नंबर उपयोगी होता है।

अगर किसी मोबाइल का आईएमईआई नंबर गैरकानूनी तरीके से बदला या उसमें छेड़छाड़ की जाती है तो डिवाइस की वास्तविक पहचान छिप सकती है। इससे चोरी के मोबाइल फोन या अपराध में इस्तेमाल उपकरण की पहचान करने में परेशानी हो सकती है। यही कारण है कि आईएमईआई से छेड़छाड़ को गंभीर उल्लंघन माना गया है।

दूरसंचार अधिनियम, 2023 में दूरसंचार सेवाओं और नेटवर्क के इस्तेमाल से जुड़े कई अपराधों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। किसी व्यक्ति को धोखा देकर या प्रतिरूपण के माध्यम से सिम या अन्य दूरसंचार पहचान हासिल करने जैसे मामलों में जेल और आर्थिक दंड की कार्रवाई हो सकती है। कुछ उल्लंघनों में तीन साल तक की कैद या 50 लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान लागू हो सकता है।

विभाग की चेतावनी आम उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। लोगों को अपने आधार, पहचान पत्र और अन्य केवाईसी दस्तावेज अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना चाहिए। कई बार मोबाइल कनेक्शन या किसी अन्य सेवा के नाम पर दस्तावेजों की कॉपी ली जाती है और बाद में उनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा रहता है। इसलिए नया सिम लेते समय अधिकृत विक्रेता और आधिकारिक प्रक्रिया का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं। दूरसंचार विभाग के संचार साथी प्लेटफॉर्म के जरिए उपयोगकर्ता अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देख सकते हैं। यदि सूची में कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे उपभोक्ता ने नहीं लिया है तो उसे रिपोर्ट करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे फर्जी तरीके से जारी सिम की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन के मामले में भी जल्द शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है। मोबाइल में बैंकिंग ऐप, व्यक्तिगत तस्वीरें, ई-मेल और अन्य संवेदनशील जानकारी मौजूद हो सकती है। इसलिए डिवाइस खोने पर सिम ब्लॉक कराने के साथ संबंधित आधिकारिक व्यवस्था के जरिए मोबाइल को ब्लॉक कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

दूरसंचार विभाग लगातार साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन और उपकरणों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मोबाइल नंबर और उपकरण की पहचान की सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विभाग का उद्देश्य फर्जी कनेक्शन और पहचान के दुरुपयोग पर अंकुश लगाकर दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित बनाना है।

नई चेतावनी के बाद स्पष्ट है कि फर्जी पहचान पर सिम लेना या जारी करना और आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करना मामूली उल्लंघन नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसे में मोबाइल उपभोक्ताओं को अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने और सिम से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में केवल अधिकृत माध्यमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

Tags: