नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को ‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ के क्रियान्वयन चरण के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) की ओर से शुरू किए गए इस अभियान को देशभर में बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अभियान के दायरे में विज्ञान से जुड़े 100 से अधिक संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें अर्थ साइंसेज सेक्टर, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से जुड़े संस्थान शामिल हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए जितेंद्र सिंह ने अभियान के विस्तार और इसके उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ को केवल कुछ सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि देशभर में विभिन्न संस्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। विशेष रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों में भी इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।
जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह कैंपेन देशभर के साइंस संस्थानों में भी चलाया जा रहा है—चाहे वे अर्थ साइंसेज सेक्टर के हों, CSIR के हों या DST के। आज देशभर के 100 से ज्यादा संस्थानों में यह कैंपेन शुरू हुआ है।”
केंद्रीय मंत्री ने पिछले वर्ष चलाए गए अभियान के परिणामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकारी खजाने में 5,500 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। उनके मुताबिक इस राशि में इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अभियान के जरिए सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में उपलब्ध अनुपयोगी सामग्री के व्यवस्थित निपटारे के महत्व की ओर ध्यान दिलाया।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप के निपटारे से भी सरकार को उल्लेखनीय राशि प्राप्त हुई। सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में समय के साथ कई प्रकार के पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य अनुपयोगी सामग्री जमा हो जाती है। अभियान के माध्यम से ऐसी सामग्री की पहचान कर उसके व्यवस्थित निपटारे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।
‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ के क्रियान्वयन चरण की शुरुआत के साथ विभिन्न विभागों और संस्थानों में अभियान से जुड़ी गतिविधियां शुरू की गई हैं। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग इस अभियान का संचालन कर रहा है। अभियान के माध्यम से सरकारी कार्यस्थलों को व्यवस्थित करने और अनुपयोगी सामग्री के निपटारे की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस बार विज्ञान संस्थानों की भागीदारी को भी प्रमुखता दी गई है। अर्थ साइंसेज सेक्टर से जुड़े संस्थानों के अलावा CSIR और DST के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में भी अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक देशभर के 100 से ज्यादा विज्ञान संस्थानों में एक साथ अभियान की शुरुआत की गई है।
जितेंद्र सिंह ने पिछले अभियान से सरकारी खजाने में जमा हुई 5,500 करोड़ रुपये की राशि का जिक्र करते हुए इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस राशि में ई-स्क्रैप से प्राप्त रकम का बड़ा योगदान रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में मौजूद पुरानी और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के व्यवस्थित निपटारे की आर्थिक उपयोगिता भी सामने आई है।
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी परिसरों और कार्यस्थलों में उपलब्ध स्थान का बेहतर इस्तेमाल भी है। पुराने रिकॉर्ड, अनुपयोगी सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय तक कार्यालयों में पड़े रहने से जगह घेरते हैं। ऐसी सामग्री की पहचान और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निपटारे से कार्यालयों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
स्पेशल कैंपेन के पिछले चरणों में विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों को जोड़ा गया था। अब इसके छठे संस्करण में अभियान को और व्यापक रूप दिया गया है। विज्ञान संस्थानों तक इसकी पहुंच इसी विस्तार का हिस्सा है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिक संस्थानों को अभियान से जोड़कर सरकारी कार्यस्थलों में स्वच्छता और व्यवस्थित कार्यप्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभियान के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित संस्थान इसमें भाग ले रहे हैं। इससे अभियान एक ही स्थान या मंत्रालय तक सीमित न रहकर व्यापक प्रशासनिक पहल के रूप में आगे बढ़ रहा है।
CSIR से जुड़े संस्थान देश में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। वहीं DST के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित कई संस्थान आते हैं। अर्थ साइंसेज सेक्टर के संस्थानों को भी अभियान से जोड़ा गया है। ऐसे में 100 से ज्यादा संस्थानों में अभियान शुरू होने से इसकी पहुंच काफी व्यापक हो गई है।
इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप पर केंद्रीय मंत्री का बयान भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। सरकारी संस्थानों में कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य तकनीकी सामग्री समय के साथ अनुपयोगी हो जाती है। ऐसी सामग्री का उचित तरीके से निपटारा न केवल कार्यस्थलों को व्यवस्थित करने में मदद करता है, बल्कि इससे आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है।
पिछले साल सरकारी खजाने में जमा किए गए 5,500 करोड़ रुपये का उल्लेख करते हुए जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसमें इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप का महत्वपूर्ण योगदान था। इस अनुभव के आधार पर मौजूदा अभियान में भी अनुपयोगी सामग्री के व्यवस्थित प्रबंधन को अहम माना जा रहा है।
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की ओर से शुरू किए गए ‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ के क्रियान्वयन चरण में अब देशभर के सरकारी संस्थान अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। विज्ञान से जुड़े 100 से अधिक संस्थानों में अभियान की शुरुआत के साथ इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अभियान के उद्घाटन के मौके पर पिछले साल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए इस बार भी व्यापक भागीदारी पर जोर दिया। सरकारी कार्यालयों में अनुपयोगी सामग्री के निपटारे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप के प्रबंधन तक, ‘स्पेशल कैंपेन 6.0’ के जरिए प्रशासनिक कार्यस्थलों को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में गतिविधियां चलाई जाएंगी।