23 दिन बाद भी नहीं टूटा सोनम वांगचुक का हौसला

Update: 2026-07-20 13:52 GMT

लद्दाख : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में 23वें दिन भी अपना अनशन जारी रखा है। उन्होंने अपना संकल्प नहीं तोड़ा और अस्पताल से हाथ से लिखा पत्र जारी कर अपनी मांगों को दोहराया। वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हो रही बर्बरता को देखकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है।

सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में कहा कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में जाकर सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें खुद अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे पहले सरकार शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी।

वांगचुक पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांगों में लद्दाख के युवाओं और लोगों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से संवाद स्थापित करना प्रमुख है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने पत्र में युवाओं के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताई। वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के अधिकारों और भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए।

सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान भी वांगचुक ने अपना आंदोलन जारी रखा है। चिकित्सकों की निगरानी में रहते हुए वह अपनी मांगों पर कायम हैं। अस्पताल से जारी उनके पत्र में साफ तौर पर लिखा गया कि वह अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेंगे और बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं।

वांगचुक ने सरकार से अपील की कि युवाओं और उनके प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर युवा नेताओं को संसद सदस्यों से मिलने की अनुमति मिलती है तो इससे संवाद का रास्ता खुलेगा और समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

उन्होंने शिक्षा मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। वांगचुक का कहना है कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े फैसले पारदर्शी तरीके से लिए जाने चाहिए।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं। वह लद्दाख के विकास और वहां के लोगों की मांगों को लेकर भी कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं।

उनके अनशन को लेकर समर्थक लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग इसे युवाओं की आवाज उठाने वाला आंदोलन बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से इस मामले में बातचीत और समाधान के प्रयासों पर भी नजर बनी हुई है।

फिलहाल सोनम वांगचुक का अनशन 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है औ

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