नई दिल्ली : पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिलने के कारण वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे। वांगचुक ने यह फैसला कई लोगों, राजनीतिक नेताओं, समर्थकों और न्यायिक हस्तक्षेप की अपीलों के बावजूद लिया है।
बुधवार रात भूख हड़ताल के 18वें दिन जारी किए गए एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि वह अब खाना शुरू कर देते हैं तो इससे एक गलत संदेश जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आंदोलन खत्म करने से क्या बदलाव आएगा, जबकि जिन मुद्दों को लेकर वह प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
"अगर मैं खाना खा लूं तो क्या संदेश जाएगा?"
अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि भूख हड़ताल खत्म करने का अर्थ यह लगाया जा सकता है कि सरकार को जवाबदेह ठहराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि प्रदर्शनकारी कुछ समय तक विरोध करेंगे और फिर बिना किसी समाधान के वापस चले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत मांग के लिए नहीं, बल्कि व्यापक मुद्दों को लेकर है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सरकार की ओर से बातचीत और समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वह अपने फैसले पर कायम रहेंगे।
समर्थकों और नेताओं ने की अपील
सोनम वांगचुक ने बताया कि भूख हड़ताल के दौरान उन्हें हजारों संदेश मिले हैं, जिनमें लोगों ने उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर चिंता जताई और भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। इसके अलावा कुछ लोगों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया, ताकि उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मनाया जा सके।
हालांकि, वांगचुक ने कहा कि इन सभी अपीलों के बावजूद वह अपने आंदोलन को जारी रखने का फैसला कर चुके हैं।
आंदोलन के पीछे की मांगें
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका आंदोलन क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़ी मांगों पर केंद्रित है।
उनका कहना है कि लद्दाख की पारिस्थितिकी और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष कदम उठाए जाने जरूरी हैं। साथ ही स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं और भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जानी चाहिए।
स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी
18 दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता बढ़ रही है। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए कई लोग उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं।
हालांकि, वांगचुक ने कहा कि वह अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाते रहेंगे।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
वांगचुक के आंदोलन के बीच अब तक सरकार की ओर से किसी बड़े निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि उनकी समस्याओं पर बातचीत की जाए और समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस आंदोलन को लेकर चर्चा जारी है। कई लोग जहां वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं, वहीं उनके समर्थक मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बात कर रहे हैं।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का संकल्प
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है।
फिलहाल, उनकी भूख हड़ताल 18वें दिन में प्रवेश कर चुकी है और वह इसे जारी रखने पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।