सफदरजंग अस्पताल: भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य में हल्का सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, वह अभी भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में हैं। इस बीच सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन से कुछ समय के लिए बाहर जाने की अनुमति मांगी है, ताकि वह प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल हो सकें।
सफदरजंग अस्पताल की ओर से सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक की नाड़ी, रक्तचाप और ऑक्सीजन का स्तर फिलहाल स्थिर है। इसके अलावा रक्त संबंधी जांच के कुछ मानकों में भी सुधार देखा गया है। हालांकि, चिकित्सकों ने उन्हें अभी भी निगरानी में रखा है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपना उपवास जारी रखा है। वह अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर एक हस्तलिखित पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कुछ समय के लिए बाहर जाने की अनुमति मांगी।
अपने पत्र में वांगचुक ने लिखा कि वह अब पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य से जुड़े ज्यादातर मानक सामान्य स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि वह ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होना चाहते हैं, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए।
सोनम वांगचुक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं और प्रदर्शनकारियों की आवाज को सुना जाना चाहिए। इससे पहले भी उन्होंने हाथ से लिखे पत्र के माध्यम से कहा था कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें खुद उनसे मिलने का अवसर नहीं मिलता, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सोनम वांगचुक को जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बांबा ने जानकारी दी कि वांगचुक का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। सफदरजंग अस्पताल और एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम चौबीसों घंटे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
डॉक्टरों की टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले किसी भी संभावित प्रभाव का समय रहते इलाज किया जा सके। अस्पताल ने कहा कि उनकी नियमित जांच की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
वांगचुक की ओर से अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मांगने के बाद अब सभी की नजर अस्पताल प्रशासन के फैसले पर है। चिकित्सक जहां उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं वांगचुक अपने आंदोलन और प्रस्तावित मार्च में भाग लेने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह लद्दाख से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार से संवाद और समाधान की मांग करते रहे हैं। उनके आंदोलन को लेकर देशभर में चर्चा बनी हुई है।
फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनका अनशन जारी है। अब देखना होगा कि उन्हें ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने के लिए अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मिलती है या नहीं। वहीं, उनके स्वास्थ्य और आगे की रणनीति पर भी सभी की नजर बनी हुई है।