सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती, पत्नी गीतांजलि ने बिना अनुमति इलाज नहीं करने की अपील की

Update: 2026-07-18 04:33 GMT

नई दिल्ली ; जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से उपवास पर थे और उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पुलिस ने यह कदम उठाया। अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भावुक अपील करते हुए डॉक्टरों से आग्रह किया कि परिवार और वांगचुक की मेडिकल टीम की मंजूरी के बिना कोई भी इलाज न किया जाए।

सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। वह सोमवार को संसद तक विरोध मार्च का नेतृत्व करने वाले थे, लेकिन लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया।




वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी किया। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि सोनम वांगचुक की इच्छा, परिवार की सहमति और उनकी मेडिकल टीम की सलाह को ध्यान में रखते हुए ही किसी प्रकार की चिकित्सा प्रक्रिया की जाए। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के मुंह के जरिए या नस के माध्यम से कोई भी उपचार न किया जाए।

गीतांजलि आंग्मो ने अपने बयान में वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई और कहा कि लंबे समय तक उपवास के बाद उनकी हालत संवेदनशील है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों से अनुरोध किया कि उपचार के दौरान सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और आपसी समन्वय बनाए रखा जाए।

वांगचुक के समर्थकों के अनुसार, उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और वह अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे थे। समर्थकों ने पुलिस द्वारा उन्हें अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए था।

वहीं, प्रशासन की ओर से कहा गया कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और किसी भी व्यक्ति की जान की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। अधिकारियों के अनुसार, चिकित्सा स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाना आवश्यक कदम था, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी निगरानी कर सकें।

सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण, हिमालयी क्षेत्र और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। वह क्षेत्र के लोगों की मांगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों को लेकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं। उनके इस आंदोलन को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों और संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है।

बताया जा रहा है कि वांगचुक अपने आंदोलन के अगले चरण के तहत संसद तक मार्च करने की तैयारी में थे। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के चलते उनकी योजना प्रभावित हुई। उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना है।

अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद डॉक्टरों की टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की स्थिति में शरीर पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से उनकी स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोनम वांगचुक का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर जहां प्रशासन स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, वहीं आंदोलन से जुड़े लोग उनकी मांगों और विरोध के अधिकार को लेकर अपनी बात रख रहे हैं।

इस बीच, उनकी पत्नी की अपील के बाद इलाज और चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। परिवार चाहता है कि वांगचुक की चिकित्सा देखभाल में उनकी मेडिकल टीम और परिजनों की राय को शामिल किया जाए। वहीं, अस्पताल प्रशासन मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरतों के आधार पर उपचार प्रक्रिया आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

फिलहाल, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया पर सभी की नजरें बनी हुई हैं। उनके समर्थक और परिवार लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

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