नई दिल्ली। दिल्ली के DDU मार्ग पर काली माता मंदिर के पास नगर निगम के सफाई अभियान के दौरान एक लकड़ी का बक्सा मिलने से हड़कंप मच गया। बक्से के अंदर कंकाल जैसा ढांचा दिखाई देने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी बुलाया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि बक्से के अंदर मौजूद हड्डियां इंसानी नहीं, बल्कि नकली थीं।दिल्ली पुलिस ने शनिवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 26 सितंबर को DDU मार्ग पर काली माता मंदिर के पास MCD की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान वहां एक लकड़ी का बक्सा मिला। बक्से को देखने पर उसके अंदर संदिग्ध कंकाल और हड्डियों जैसा ढांचा नजर आया।
कंकाल जैसा ढांचा मिलने की जानकारी सामने आते ही मौके पर मौजूद लोगों में भी इसे लेकर उत्सुकता और चिंता बढ़ गई। मामले की सूचना दिल्ली पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की।पुलिस ने लकड़ी के बक्से की जांच की तो उसमें पुराने तरीके से जोड़ा गया कंकाल जैसा ढांचा मिला। पहली नजर में यह मानव कंकाल जैसा दिखाई दे रहा था। मामला संदिग्ध लगने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि बक्से में मौजूद हड्डियां वास्तव में इंसानी हैं या किसी अन्य चीज से बनाई गई हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की शुरुआती जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई। जांच में पाया गया कि लकड़ी के बक्से में रखी गई हड्डियां नकली थीं। ये किसी इंसान के कंकाल के अवशेष नहीं थे। शुरुआती जांच के इस निष्कर्ष के बाद मानव कंकाल मिलने की आशंका दूर हो गई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बक्से और उसके आसपास भी जांच की गई। पुलिस ने बताया कि वहां खून के धब्बे या किसी तरह की अन्य संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस ने कहा, “बक्से पर या उसके आस-पास खून के धब्बे या कोई और संदिग्ध चीज नहीं मिली।”घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने बक्से की जांच सावधानी से की। कंकाल जैसे ढांचे की बनावट पुरानी शैली में जोड़ी गई दिखाई दे रही थी। हालांकि केवल इसे देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय फोरेंसिक विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई गई। विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में ही हड्डियों के नकली होने की जानकारी सामने आई।
DDU मार्ग पर सफाई अभियान के दौरान अचानक इस तरह का बक्सा मिलने से शुरुआत में मामला गंभीर प्रतीत हुआ। खासकर बक्से के अंदर कंकाल जैसा ढांचा मौजूद होने के कारण कई तरह की आशंकाएं पैदा हो सकती थीं। यही कारण रहा कि इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता ली।पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि क्या बक्से में मौजूद हड्डियां इंसानी हैं। शुरुआती फोरेंसिक जांच से इसका जवाब मिल गया और विशेषज्ञों ने हड्डियों को नकली बताया। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि बक्से के अंदर मौजूद ढांचा वास्तविक मानव कंकाल नहीं था।
पुलिस की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, लकड़ी के बक्से पर किसी प्रकार के खून के निशान नहीं मिले। उसके आसपास भी ऐसी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिससे किसी आपराधिक घटना का तत्काल संकेत मिलता हो। ऐसे में शुरुआती जांच में वास्तविक मानव अवशेष मिलने की आशंका की पुष्टि नहीं हुई।घटना उस समय सामने आई जब MCD का सफाई अभियान चल रहा था। सफाई के दौरान कर्मचारियों की नजर लकड़ी के बक्से पर पड़ी थी। उसके अंदर मौजूद कंकाल जैसे ढांचे को देखते हुए मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचाई गई। इसके बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।इस मामले में फोरेंसिक जांच की भूमिका महत्वपूर्ण रही। केवल बाहरी रूप से देखने पर ढांचा कंकाल जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन विशेषज्ञों की जांच में हड्डियों के नकली होने की बात सामने आई। इससे यह साफ हो गया कि बक्से में किसी इंसान के कंकाल के अवशेष नहीं रखे गए थे।
पुलिस ने मौके की परिस्थितियों की भी जांच की और बक्से तथा आसपास के क्षेत्र को देखा। खून के निशान या अन्य संदिग्ध सामग्री नहीं मिलने की जानकारी भी पुलिस ने दी है। इससे शुरुआती स्तर पर किसी गंभीर आपराधिक घटना से जुड़ी आशंका को बल नहीं मिला।फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, DDU मार्ग पर काली माता मंदिर के पास सफाई अभियान के दौरान मिले लकड़ी के बक्से में मौजूद कंकाल जैसा ढांचा वास्तविक मानव कंकाल नहीं था। फोरेंसिक विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में हड्डियों को नकली पाया गया है। पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि बक्से या उसके आसपास खून के धब्बे अथवा कोई अन्य संदिग्ध चीज नहीं मिली।
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