नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र में गंभीर सूखे की स्थिति के बीच उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों की स्थिति, किसानों की परेशानी, पानी की उपलब्धता, फसलों के नुकसान और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

शिंदे ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में जल उपलब्धता, कृषि की मौजूदा स्थिति और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य के किसानों के साथ खड़ी है और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शिंदे ने विश्वास जताया कि सूखे से प्रभावित किसानों के लिए अच्छी-खासी आर्थिक मदद मिल सकती है।

महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था। यानी करीब 74 प्रतिशत तालुके सूखे की श्रेणी में आ चुके हैं। बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में जलस्रोतों का स्तर नीचे चला गया है, फसलों पर असर पड़ा है और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी चुनौती बनती जा रही है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक मदद की उम्मीद कर रही है।

उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि सूखे की स्थिति व्यापक है और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य भी प्रभावित क्षेत्रों में जाकर हालात का जायजा ले रहे हैं। सरकार जिला स्तर से रिपोर्ट जुटाकर नुकसान का आकलन कर रही है। शिंदे ने कहा कि किसानों की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार किसी भी तरह की सहायता देने में पीछे नहीं हटेगी।

बैठक के बाद शिंदे ने कहा कि किसानों का सरकारी खजाने पर पहला अधिकार है। उन्होंने पिछले साल भारी बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान के बाद दी गई मदद का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि प्राकृतिक आपदा चाहे अतिवृष्टि हो या सूखा, सरकार की प्राथमिकता किसानों को राहत देना है।

शिंदे ने बताया कि महाराष्ट्र में किसानों को फिलहाल सालाना 12 हजार रुपये की सहायता मिलती है। इसमें 6 हजार रुपये केंद्र की किसान सम्मान योजना और 6 हजार रुपये महाराष्ट्र सरकार की नमो शेतकरी योजना के तहत दिए जाते हैं। हालांकि मौजूदा सूखा संकट को देखते हुए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

प्रधानमंत्री से हुई बातचीत में पेयजल की उपलब्धता भी अहम मुद्दा रही। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में आने वाले महीनों में पानी की कमी और बढ़ने की आशंका है। राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर से महाराष्ट्र के सभी शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में कम से कम 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का फैसला किया है। सिंचाई के लिए पानी देने से पहले पेयजल और पशुओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

सूखे के चलते कृषि क्षेत्र पर सबसे बड़ा दबाव है। कई इलाकों में बारिश की कमी से खरीफ फसल प्रभावित हुई है, जबकि रबी सीजन की तैयारियों पर भी संकट मंडरा रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से बुआई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।

शिंदे ने बताया कि केंद्र सरकार की एक टीम जल्द महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित गांवों का दौरा करेगी। यह टीम जमीनी हालात का आकलन करेगी और पानी, फसल नुकसान तथा चारे की स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाएगी। इसी आकलन के आधार पर केंद्र की ओर से सहायता का स्वरूप और मात्रा तय की जा सकती है।

राज्य सरकार के सामने पशुधन की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। सूखे के दौरान चारा और पानी दोनों की कमी होती है। ऐसे में सरकार को चारा शिविर, पानी के टैंकर और पशु चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ सकती है। प्रधानमंत्री के साथ बैठक में इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

शिंदे ने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि किसानों की दिवाली सूखे के संकट के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को राहत देने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर काम करेंगे। हालांकि सहायता की राशि और उसके वितरण की विस्तृत योजना अभी घोषित नहीं की गई है।

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की समस्या बढ़ रही है और कुछ क्षेत्रों से रोजगार के लिए पलायन की खबरें भी सामने आ रही हैं। जलाशयों और भूजल स्तर में गिरावट के कारण आने वाले महीनों में संकट और गंभीर हो सकता है।

राज्य सरकार ने पानी की बचत के लिए उद्योगों को भी अपने पानी के उपयोग का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा पुनर्चक्रित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अवैध जल दोहन पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री मोदी और एकनाथ शिंदे की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि महाराष्ट्र सरकार केंद्र से राहत पैकेज की उम्मीद कर रही है। केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद सूखा राहत के लिए आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल राज्य सरकार जिला स्तर पर नुकसान का आकलन कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय बनाए हुए है। शिंदे ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्रीय टीम के दौरे के बाद किसानों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए कितनी सहायता घोषित होती है

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